राम मंदिर सोनारी स्थित नये पार्क में रविवार की सुबह सैर करने आये लोगों से हमने डे जीरो में जमशेदपुर का नाम आने पर चर्चा की. सीएइ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में डे जीरो में 21 शहरों को शामिल किया गया है. जिसमें अपना जमशेदपुर भी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन शहरों में वर्ष 2030 तक उपलब्ध पीने के पानी के सभी स्रोत खत्म हो जायेंगे.
इस पर सभी ने आश्चर्य जताया. कहा कि यह खतरे की घंटी है. इसके लिए अभी से सचेत हो जाना चाहिए. मौके पर मकर संक्रांति महापर्व पूजा कमेटी की ओर से पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर पौधे बांटे गये. सभी से अधिक-से-अधिक पौधे लगाने की अपील भी की गयी. प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश :
हर घर में किचेन का पानी बर्बाद जा रहा है. इस दिशा में काम करने की जरूरत है. सब्जी, चावल, दाल का धोया पानी धरती को मिलना चाहिए. हर किचेन में इसकी व्यवस्था होनी चाहिए.
– सुशील अग्रवाल
धरती बचाने और वाटर लेवल ठीक करने के लिए अधिक-से-अधिक पेड़-पौधे लगाने की जरूरत है. पेड़-पौधे जितने रहेंगे, बारिश उतनी ही अच्छी होगी. इसे स्कूल स्तर पर बताने की जरूरत है.
– शंकर सिंह मुंडा
नदी, तालाब व अन्य वाटर बॉडी को बचाने की जरूरत है. यही वाटर लेवल को ठीक रखता है. जमशेदपुर में स्वर्णरेखा को बचाने की मुहिम चल रही है. जो अच्छी पहल है.
