जमशेदपुर : बागबेड़ा-घाघीडीह क्षेत्र में गर्मी आते ही पेयजल किल्लत शुरू हो जाती है. इन पंचायतों के अधिकांश इलाकों में जलस्तर 400-500 फीट नीचे चला गया है. चापाकल से बूंद-बूंद पानी गिरता है. कई चापाकल मौसमी हो गये हैं. बरसात के दिनों में उनमें पानी मिलता है जबकि अन्य मौसम में पानी निकलना बंद हो जाता है.
कुछ लोगों ने घरों में डीप बोरिंग कर पानी की समस्या का समाधान कर लिया है लेकिन बड़ी आबादी अब भी सामुदायिक चापाकल पर ही निर्भर है. गर्मी में कई परिवार सुबह से शाम तक पानी की व्यवस्था में ही लगे रहते हैं. घाघीडीह क्षेत्र में पानी के लिए जेल चौक पर लगे दो डीप बोरिंग बड़ी आबादी का सहारा बने हुए है. सुबह 3 बजे से डीप बोरिंग पर जार व बाल्टी-डेकची की कतार लग जाती है. दिनभर यहां पानी के लिए भीड़ लगी रहती है. शाम 4 बजे के बाद मेला सा लग जाता है. दो डीप बोरिंग से सात पंचायत के लोग पीने का पानी लेने के आते हैं.
विधायक के सहयोग से लगाया गया है समरसेबल. विधायक मेनका सरदार की निधि से दोनों 600-600 फीट डीप बोरिंग में समरसेबल पंप लगाकर उसे टंकी से जोड़ दिया है. समरसेबल खराब होने पर स्थानीय युवा ही निजी खर्च से उसकी मरम्मत कराते है.
प्राकृतिक जल श्रोत खत्म हो चुके हैं. बस्ती वासियों का कहना है कि बागबेड़ा, घाघीडीह व कीताडीह क्षेत्र में कभी पेजयल की समस्या नहीं थी. लेकिन प्राकृतिक जल श्रोतों के खत्म होने से पानी की समस्या शुरू हो गयी है. तालाब और कुओं को मिट्टी से भरकर घर बना दिये गये है. बढ़ती फ्लैट संस्कृति व वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाना क्षेत्र में जलसंकट का बड़ा कारण बन रहा है.
