जमशेदपुर : सिविल प्रशासन एवं सेना से जुड़े मामलों के समाधान के लिए बुधवार को रांची में गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के दो मामले उठे. धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के लिए चिह्नित जमीन पर सेना के अधिकारियों ने पुन: दावा करते हुए उसे सेना के नाम म्यूटेशन करने की मांग रखी.
प्रधान सचिव ने इस बाबत बैठक में मौजूद पूर्वी सिंहभूम के अपर उपायुक्त सौरव कुमार सिन्हा से जानकारी मांगी. एडीसी श्री सिन्हा ने बताया कि सेना द्वारा जिस जमीन पर दावा किया गया है, वह जमीन 1964 के हाल सर्वे खतियान में वन भूमि के रूप में दर्ज है अौर उसका म्यूटेशन संभव नहीं है. इसके बाद प्रधान सचिव ने सेना के अधिकारियों को पूरे मामले का अध्ययन करने का भरोसा दिया.
बैठक में रांची व हजारीबाग के आयुक्त, राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव उदय प्रताप, रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर के एडीसी, रामगढ़ के डीडीसी अौर सेना के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. बैठक में रांची अौर हजारीबाग के सेना अौर सिविल प्रशासन से जुड़े ज्यादा मामलों पर चर्चा हुई. यह बैठक पिछले पांच बार से अलग-अलग कारणों से स्थगित हो जा रही थी.
सर्किट हाउस में सेना को सौ एकड़ जमीन ट्रांसफर करने का मामला राजस्व सचिव देखेंगे. बैठक में सर्किट हाउस एरिया में सौ एकड़ जमीन सेना को हस्तांतरित करने के मुद्दे पर चर्चा हुई, जिस पर गृह विभाग के प्रधान सचिव श्री रहाटे ने कहा कि इस मामले को राजस्व विभाग के सचिव देखेंगे. सौ एकड़ जमीन को लीज से लेकर सेना को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव जिला से पूर्व में ही राजस्व विभाग को भेजा जा चुका है.
1964 के सर्वे खतियान के अनुसार जमीन वन विभाग की
जमशेदपुर. धालभूगढ़ अौर चाकुलिया एयरपोर्ट की जमीन पर सेना का लंबे समय से दावा है अौर सेना के अधिकारियों द्वारा पिछले साल कागजात, नक्शा देते हुए जमीन का म्यूटेशन करने की मांग जिला प्रशासन से भी की थी. सेना ने 1943-44 में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की 413. 62 एकड़ जमीन ब्रिटिश राज के दौरान लैंड एक्यूजेशन एक्ट के तहत अौर चाकुलिया एयरपोर्ट की 302 एकड़ जमीन डिफेंस अॉफ इंडिया रुल्स के तहत अधिग्रहित किया था. इसके लिए शुल्क भी जमा किया था.
जिला प्रशासन द्वारा नये सिरे से 150 एकड़ पर प्रस्तावित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का प्रस्ताव राजस्व एवं निबंधन विभाग तथा परिवहन एवं नागर विमानन विभाग को भेजा था. 150 एकड़ में 131. 56 एकड़ को 1964 के हाल सर्वे खतियान के अनुसार वन भूमि है बताया गया है, जिस पर सेना का दावा है.
