Jamshedpur news. ओलचिकी लिपि समृद्ध व विकसित करने में योगदान देने वाले 100 विशिष्ट लोग सम्मानित किये जायेंगे

ओडिशा रायरंगपुर के ढांढबोस में तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ 12 मई से, ओलचिकी लिपि के आविष्कार का शताब्दी समारोह और गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की 120वीं जयंती समारोह में संताल समाज के लोगों का होगा महाजुटान

Jamshedpur news.

मयूरभंज जिले (ओडिशा) के रायरंगपुर ढांढबोस में ओलचिकी लिपि के आविष्कार (1925-2025) का शताब्दी समारोह और गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की 120वीं जयंती समारोह 12, 13 और 14 मई भव्य तरीके से मनाया जा रहा है. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और मेगा लिटरेचर फेस्टिवल कार्यक्रम का भी आयोजन हो रहा है. प्रथम दिन यानी 12 मई को कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी व विशिष्ट अतिथि के रूप में बिशेश्वर टुडू, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट ओडिशा सरकार के मंत्री डॉ कृष्णा चंद्र महापात्रा, मंत्री गणेश राम सिंह कुंटिया, सांसद नबा चरण माझी, सांसद ममता महंता, रायरंगपुर के विधायक जलेन नायक, बारीपदा के विधायक प्रकाश सोरेन, सरसकोना के विधायक भादब हांसदा व बांगरीपोसी के विधायक संजली मुर्मू मौजूद रहेंगी. ओलचिकी लिपि के आविष्कार का शताब्दी समारोह और गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की 120वीं जयंती समारोह का विधिवत शुभारंभ ओलगुरु पंडित रघुनाथ मुर्मू की तसवीर पर माल्यार्पण कर किया जायेगा. वहीं चूंकि ओलचिकी लिपि के आविष्कार का 100 वर्ष पूरा हो रहा है, इसलिए इस आयोजन को खास बनाने के लिए इस दौरान ओलचिकी लिपि समृद्ध व विकसित बनाने में अहम योगदान देने वाले 100 विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया जायेगा. साथ ही 100 ओलचिकी शैक्षणिक संस्थान व साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकारों को भी विशेष सम्मान दिये जायेंगे. इस दौरान आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के 15 प्रमुखों को भी सम्मानित किया जायेगा.

ओलचिकी के आविष्कार का इतिहास और पंडित रघुनाथ मुर्मू का जीवन व कार्य पर होगी चर्चाओलचिकी लिपि के आविष्कार का शताब्दी समारोह के दूसरे दिन प्रथम सत्र में ओलचिकी लिपि के आविष्कार का इतिहास और पंडित रघुनाथ मुर्मू का जीवन व कार्य पर चर्चा की जायेगी. इसमें मुख्य अतिथि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री सुदाम मरांडी व पूर्व राज्यसभा सांसद सरोजनी हेंब्रम मौजूद रहेंगे. ओलचिकी के आविष्कार का इतिहास के विषय पर डॉ जतींद्रनाथ बेसरा, पंडित रघुनाथ मुर्मू जीवनी पर विद्यासागर यूनिवर्सिटी मेदनीपुर की डॉ दुली हेंब्रम एवं गुरु गोमके द्वारा किये गये कार्य पर गोड्डा के रिसर्च स्कॉलर डॉ मनोज कुमार टुडू अपनी बातों को रखेंगे. वहीं दूसरे सत्र में ओलचिकी लिपि का भेद और संताली भाषा में इसका प्रयोग पर चर्चा की जायेगी. इसमें विश्व भारती शांतिनिकेतन के डॉ धनेश्वर माझी, बांकुड़ा यूनिवर्सिटी के डॉ फटीक मुर्मू, सिदो-कान्हू यूनिवर्सिटी के डॉ श्रीपति टुडू अपनी बातों को रखेंगे. तीसरे सत्र में संताली भाषा साहित्य के इतिहास पर चर्चा की जायेगी. इसमें डॉ डुमनी माई मुर्मू, डॉ गुरुचरण मुर्मू, डॉ सुनाराम सोरेन अपनी बातों को रखेंगे. कार्यक्रम के अंतिम दिन यानी 14 मई को मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में मंत्री बीरबाहा हांसदा एवं सामाजिक कार्यकर्ता पर्ण चंद्र हेंब्रम मौजूद रहेंगे. इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में संताली भाषा व ओलचिकी लिपि का उपयोग पर चर्चा किया जायेगा. इस विषय पर बालिका हेंब्रम, लखो बास्के, संजय कुमार हेंब्रम, दमरूधर सोरेन एवं मिथुन टुडू अपनी बातों को रखेंगे.

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