नशा का सेवन कर महिला - पुरुष बन रहे मनोरोगी

नशे के कारण एक ओर युवा वर्ग बर्बाद हो रहा है.वहीं परिवार टूट रहे हैं. दूसरी ओर नशे के कारण (Psychopath) मनोरोगियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अ

Jamshedpur News: नशे के कारण एक ओर युवा वर्ग बर्बाद हो रहा है.वहीं परिवार टूट रहे हैं. दूसरी ओर नशे के कारण (Psychopath) मनोरोगियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अगर सिर्फ सदर अस्पताल के मनोरोग विभाग की बात करें, तो हर माह 20 से 25 व्यक्ति नशे के कारण बीमार हो कर आ रहे हैं. ये मरीज किसी न किसी प्रकार के नशे के आदी हैं. इनमें से अधिकांश मरीज ब्राउन शुगर और सूखा नशा करने वाले हैं.
ब्राउन शुगर, शराब, तंबाकू तथा गांजा सेवन के आदी मरीज अधिक : चिकित्सक
मनोरोग विभाग के चिकित्सक डॉ दीपक गिरि ने बताया कि इन दिनों ज्यादातर रोगी ऐसे आ रहे हैं, जो ब्राउन शुगर, शराब, तंबाकू तथा गांजा सेवन के आदी हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि पहले नशा के कारण मानसिक रोग से ग्रसित मरीजों की संख्या काफी कम होती थी. वहीं हाल के दिनों में नशा के कारण बीमार मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है. नशे के आदी होने के कारण व्यक्ति अपने निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह से खो देता है. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं हो पाा है कि क्या सही है और क्या गलत. ऐसे में उनके साथ कोई अनहोनी होते रहता है. सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों के अनुसार नशे के कारण बीमारी से ग्रसित मरीजों में सबसे ज्यादा मनोरोगी मानगो, आदित्यपुर, टेल्को, बिरसानगर व सीतारामडेरा से आ रहे हैं.
नशे के कारण महिलाएं भी हो रहीं Psychopath
नशे का सेवन करने से बीमार होने वालों में पूर्व में पुरुष या युवा ही होते थे. वहीं वर्तमान में महिलाओं में भी नशे की लत काफी बढ़ गयी है. अब नशे से बीमार होकर महिला मरीज भी इलाज करने के लिए मनोरोग विभाग में आ रही हैं. इनमें से कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो कि ब्राउन शुगर का नशा करने के कारण उनकी स्थिति खराब हो गयी है. हालांकि महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से अपना इलाज कराने में अब भी सामने नहीं आती हैं. नशे से ग्रसित महिलाओं की संख्या भी काफी है, लेकिन बदनामी के डर या पारिवारिक कारणों से इलाज कराने कम संख्या में पहुंच रही हैं. वे फोन के माध्यम से नशा से छुटकारा पाने का सुझाव मांगती हैं.
कोल्हान में मनोरोगियों को भर्ती करने की नहीं है व्यवस्था
मनोरोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन उसके बावजूद भी कोल्हान में मनोरोगियों को भर्ती कर उनका इलाज करने की कोई व्यवस्था नहीं है. ओपीडी सुविधा होने के कारण डॉक्टर मरीज को देखते हैं. उसका काउंसलिंग करते है. उसके बाद दवा देकर भेज देते हैं. इस कारण से कुछ मनोराेगी ठीक भी होते हैं, लेकिन नशे के कारण गंभीर अवस्था में जा चुके मनोरोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है, क्योंकि वह घर पर रहने के दौरान खुद को रोक नहीं पाते और फिर से नशा कर लेते हैं. ऐसे मरीजों का बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची स्थित रिनपास भेजा जाता है. इनमें से कई ऐसे भी मरीज हैं, जो कि आर्थिक रूप से काफी कमजोर होते है. इस कारण वे इलाज के लिए शहर से बाहर नहीं जा पाते हैं.

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Author: Nikhil Sinha

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