TDPL को परीक्षा कराने का काम मिला कैसे? ब्लैकलिस्ट से nomination तक, समझें पूरा मामला

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा खुलासा हुआ है. TDPL कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के बावजूद परीक्षा कराने का जिम्मा कैसे मिला, इसकी CID जांच में परतें खुल रही हैं. जानें पूरी प्रक्रिया और घपले का सच.

TDPL Exam Scam: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL एक बार फिर जांच के केंद्र में है. सरकार ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं पर कार्रवाई का फैसला लिया है. वहीं CID की जांच में अब यह सवाल भी अहम हो गया है कि जिस कंपनी को पहले ब्लैकलिस्ट किया गया था, उसे बाद में राज्य की महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी आखिर किस प्रक्रिया के तहत दी गयी.

2024 में ब्लैकलिस्ट हुई थी TDPL

TDPL को वर्ष 2024 में JSSC की ओर से आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा से जुड़ी शर्तों के कथित उल्लंघन और अन्य अनियमितताओं के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात जांच में सामने आयी है. इसके बावजूद बाद में कंपनी को JPSC की परीक्षाओं के संचालन से जुड़ा काम मिला.

यहीं से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है कि किसी संवेदनशील सरकारी परीक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले कंपनी का पिछला रिकॉर्ड और उसकी ब्लैकलिस्टिंग क्यों नहीं जांची गयी.

टेंडर में शामिल हुए बिना कैसे मिला काम?

CID की जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि JPSC की ओर से TDPL को परीक्षा कराने का काम nomination के आधार पर दिया गया था. यानी कंपनी ने इसके लिए सामान्य प्रतिस्पर्धी tender process में हिस्सा नहीं लिया था. जांच में यह भी सवाल उठाया गया है कि कंपनी का background verification किस स्तर पर किया गया था.

जांच के दौरान पूछताछ में JPSC की तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता कुमारी गुप्ता से भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल किये गये. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि उनके स्तर पर कंपनी का background check नहीं किया गया था और nomination के आधार पर फाइल को मंजूरी मिलने के बाद work order जारी हुआ.

TDPL को सिर्फ परीक्षा कराने तक सीमित नहीं रखा गया

जांच में एक और महत्वपूर्ण सवाल परीक्षा संचालन की पूरी जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को देने को लेकर उठ रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक TDPL को परीक्षा की प्रक्रिया में question paper setting, printing, transportation और दूसरे प्रशासनिक कार्यों समेत end-to-end जिम्मेदारी दी गयी थी.

CID इस व्यवस्था को इसलिए भी जांच रही है क्योंकि एक ही एजेंसी के पास परीक्षा प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण हिस्से होने से स्वतंत्र check-and-balance की व्यवस्था कमजोर हो सकती है.

CID को TDPL के दफ्तर से मिलीं उत्तर पुस्तिकाएं

जांच के दौरान CID को रांची स्थित TDPL के कार्यालय से Forest Range Officer परीक्षा से संबंधित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं मिलने की बात भी सामने आयी है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ये उत्तर पुस्तिकाएं कंपनी के कार्यालय तक कैसे पहुंचीं और वहां इन्हें रखने की अनुमति किस स्तर पर थी.

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाएं अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज मानी जाती हैं.

JPSC परीक्षा की answer key को लेकर भी जांच

CID की जांच में JPSC प्रारंभिक परीक्षा की answer key कथित तौर पर परीक्षा के परिणाम जारी होने से काफी पहले TDPL के कर्मचारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आयी है. जांच एजेंसी को संदेह है कि खाली छोड़ी गयी OMR शीट में बाद में उत्तर भरने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया हो सकता है. इन आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

अब सरकार ने TDPL की परीक्षाओं पर लिया बड़ा फैसला

झारखंड सरकार ने 17 अगस्त 2026 को TDPL से करायी गयी परीक्षाओं, उनके परिणाम और उनसे जुड़े चयन को रद्द करने का फैसला लिया. साथ ही वर्ष 2014 से अब तक TDPL के माध्यम से हुई परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच का आदेश दिया गया. JSSC-CGL परीक्षा को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया.

सरकार के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि परीक्षाओं में क्या गड़बड़ी हुई, बल्कि यह भी है कि एक संवेदनशील सरकारी भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी TDPL को किस प्रक्रिया से मिली और उस समय कंपनी के पुराने रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं हुई.

अब जांच के दायरे में कौन-कौन से सवाल?

  • TDPL को nomination के आधार पर काम देने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया?
  • कंपनी के पुराने blacklist रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं हुई?
  • work order जारी करने से पहले background verification हुआ था या नहीं?
  • एक ही एजेंसी को परीक्षा की end-to-end जिम्मेदारी क्यों दी गयी?
  • TDPL के कार्यालय में अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं कैसे पहुंचीं?
  • कथित answer key sharing की जांच में और कौन लोग सामने आते हैं?
  • TDPL से जुड़ी पुरानी परीक्षाओं में भी इसी तरह की कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं?

निष्कर्ष

TDPL प्रकरण अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है. जांच का दायरा कंपनी को परीक्षा का काम देने की प्रक्रिया, उसके पुराने रिकॉर्ड, अधिकारियों की भूमिका और परीक्षा संचालन में अपनायी गयी व्यवस्था तक पहुंच गया है. सरकार द्वारा 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच के आदेश के बाद आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि कंपनी को सरकारी भर्ती परीक्षाओं की जिम्मेदारी देने में किन स्तरों पर चूक हुई.


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लेखक के बारे में

By वैभव विक्रम

वैभव विक्रम डिजिटल पत्रकार हैं. बीते 5 सालों से झारखंड की सामाचार, खेल, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, धर्म में रुचि है और इसी विषय पर अपने विचार प्रकट करना पसंद है. वर्तमान में प्रभात खबर के झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के जिलों की खबरों को कवर कर रहे हैं. इससे पहले वह साल 2023-24 में प्रभात खबर के खेल डेस्क की खबरें लिखा करते थे.

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