महिलाएं सोच का दायरा बढ़ायें, तभी समृद्ध समाज का निर्माण होगा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : प्रभात खबर की परिचर्चा में महिलाओं ने खुल कर रखी अपनी बात

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : प्रभात खबर की परिचर्चा में महिलाओं ने खुल कर रखी अपनी बात

हजारीबाग. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रभात खबर की ओर से परिचर्चा का आयोजन किया गया. सदर प्रखंड के सभागार में आयोजित इस परिचर्चा में प्रखंड की दर्जनों महिलाओं ने हिस्सा लिया. महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय दिवस की महत्ता और महिलाओं की समाज में भागीदारी को लेकर अपनी बातें खुल कर रखीं. महिलाओं ने कहा कि महिलाएं समाज में अपने महत्व को बतायें और सोच का दायरा बढ़ायें, तभी हम एक समृद्ध समाज का निर्माण कर सकेंगे.

सदर बीडीओ नीतू सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को गर्व की अनुभूति होती है. महिलाएं परिवार के अलावा समाज में भी अपना योगदान दे रही हैं. यह एक-दो दिन में हमलोगों को हासिल नहीं हुआ है, पूर्व के समाज सुधारकों के कारण हमें यह प्राप्त हुआ है. महिलाओं को सशक्त करने में सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का विकास ��ोने से समाज में भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध भी हो रहे हैं.

जेएसएलपीएस के प्रखंड प्रोग्राम पदाधिकारी रितिका कुमारी मंडल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के आत्मविश्वास बढ़ाता है. महिलाएं अब जीवन में हो रहे बदलाव को महसूस कर रही हैं. उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं अपने परिवार में तीन पीढ़ी के बाद मैं पहली बेटी हूं. परिवार के सदस्यों से हमें काफी सहयोग मिला है, जिसके कारण मैं घर से बाहर निकल कर यहां पर काम कर रही हूं.

सीडीपीओ प्रतिमा कुमारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को सफल महिलाओं से सबक लेने की जरूरत है. यहां पर हमलोगों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आर्थिक रूप से सशक्त होने के बजाय संस्कार में भी सशक्तीकरण होनी चाहिए. पिछले कुछ वर्षों में एकल परिवार की परंपरा बढ़ी है. इस कुरीति के पीछे भी हम जैसी महिलाएं भी दोषी हैं.

महिला पर्यवेक्षिका सरस्वती देवी ने कहा कि महिलाएं समाज में अपना योगदान दे रही हैं. पलामू में जिस समय पदस्थापित थी, उस समय उस क्षेत्र में बाल विवाह को रोकने के लिए काफी काम किया था. अपने दम पर दो बार बाल विवाह को रोक चुकी हूं. इसका विरोध भी हमें झेलना पड़ा.

सुधा देवी ने कहा कि आज भी गांव की महिलाएं शिक्षा और अन्य अधिकारों को लेकर अनभिज्ञ हैं. मैं इसका खुद भुक्तभोगी हूं. मुझे मायके में मैट्रिक की परीक्षा इसलिए नहीं देने दिया गया, क्योंकि उस समय बोर्ड की परीक्षा लिखने के लिए गांव की लड़कियों को शहर जाना पड़ता था. 10वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2007 में मेरी शादी हो गयी. शादी के 11 साल बाद 2018 में मैट्रिक की परीक्षा लिखी और उसके बाद इंटर और बीए तक की पढ़ाई पूरी की.

सुमन कुमारी ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं. महिलाएं घर से बाहर निकल कर शिक्षा, आर्थिक विकास व अन्य जिम्मेदारियों को निभा रही हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं को परिवार से सहयोग मिले, तो वह बेहतर कर सकती हैं. मैंने शादी के बाद एमए तक की पढ़ाई पूरी की और वह भी ओवर ऑल फस्ट डिवीजन आयी हूं.

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By Prabhat khabar news desk

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