ब्रह्म संगीत से भावविभोर हुए श्रोता

हजारीबाग ब्रह्म समाज में माघ उत्सव का आयोजन

हजारीबाग. शहर की नव जागरण परंपरा की अग्रणी संस्था हजारीबाग ब्रह्म समाज में रविवार को माघ उत्सव का आयोजन किया गया. इस अवसर पर सर्वोच्च ब्रह्म को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शास्त्रों का पाठ किया गया. ब्रह्म संगीत की प्रस्तुति दी गयी. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित ब्रह्म समाज के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर प्रतिवर्ष माघ उत्सव मनाया जाता है. कोलकाता ब्रह्म समाज से आयीं आचार्य सुप्रतिमा चक्रवर्ती ने ईश्वर आराधना का संचालन किया. संगीत प्रस्तुति दो दलों द्वारा दी गयी. पहले दल में सुप्रतिमा चक्रवर्ती के साथ एलोरा चक्रवर्ती, जयश्री डे और सुपर्णा नंदी थीं. जबकि दूसरे दल में हजारीबाग की तापसी दास और सुलगना ने रविंद्र संगीत सहित अन्य ब्रह्म संगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया. कार्यक्रम की व्यवस्था में वर्तमान सचिव नीलांजन चटर्जी सहित कई सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. माघ उत्सव में समाज के सुकल्याण मोइत्रा, सुजीत भट्टाचार्य, अमित भौमिक, नरेंद्रनाथ डे, मौमिता मल्लिक, पायल मुखर्जी, पापिया भट्टाचार्य, वर्षा डे, सरिता मोइत्रा, सुप्रिया भट्टाचार्य, रोमा राय, संपा चौधरी, सुदर्शना राय, मिताली डे, मुकुल राय, मोना मुखर्जी, इंद्राणी मुखर्जी, नीता चटर्जी, रूपा चटर्जी, सुभोश्री, विश्वजीत राय, प्रदीप सेन गुप्ता, प्रोबीर मोतीलाल, सुजीत मुखर्जी, मनोज सेन, असित कुमार बनर्जी, सुबल विश्वास, जीत मोतीलाल, शुभम मोइत्रा, दीप ज्योति, अरिजीत मल्लिक, अदृश्य चौधरी आदि शमिल थे.

जदुनाथ मुखर्जी ने हजारीबाग ब्रह्म समाज की स्थापना की थी

आचार्य सुप्रतिमा चक्रवर्ती ने बताया कि 1867 में जदुनाथ मुखर्जी ने अपनी भूमि दान कर हजारीबाग ब्रह्म समाज की स्थापना की थी, जो आगे चलकर तत्कालीन बंगाल प्रांत में पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र बना. उन्होंने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर सहित कई महान विभूतियों का यहां आगमन हुआ. समाज के प्रयासों से 1930 के दशक में हरिजन समाज की शिक्षा के लिए छह विद्यालय खोले गये, जिनमें से दो आज भी सरकारी विद्यालय के रूप में संचालित हैं.

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Published by: Sunil prasad

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