हजारीबाग: जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से झारखंड में आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में कमी का खतरा है. इससे राज्य में आदिवासी प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है. यह बातें पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने बुधवार को हजारीबाग परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि वह परिसीमन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए. बल्कि आबादी के अनुपात में इन सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि आदिवासी सीटों में कमी होने से भविष्य में आदिवासी मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी प्रभावित हो सकती है.
ये भी पढ़ें- फाइलेरिया मुक्त झारखंड की ओर बढ़ते कदम, स्कूलों में बच्चों की हो रही नि:शुल्क जांच
आदिवासी एकता महाजुटान रैली को सफल बनाने की अपील
बंधु तिर्की ने 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को परिसीमन की लड़ाई के साथ अपना नेतृत्व भी मजबूत करना होगा. राज्य गठन के 26 वर्ष होने को हैं, बावजूद इसके आदिवासी समाज के सामने नेतृत्व का संकट बना हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से परिसीमन के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित करने की मांग की. उनका कहना था कि परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और इसमें आदिवासी समाज के हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
आदिवासी सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग
आदिवासी नेता शशि पन्ना ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आदिवासी आरक्षित सीटों में कमी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने परिसीमन के दौरान आदिवासी आरक्षित सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग की. नीरज सिंह भोक्ता ने कहा कि 30 अगस्त को होने वाली आदिवासी एकता महाजुटान रैली आदिवासी समाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. प्रेसवार्ता का संचालन विक्की धान ने किया. मौके पर रुचि कुजूर, महेंद्र बेग, सुशील उड़िया समेत कई लोग मौजूद थे.
ये भी पढ़ें- नाम पूछने के बहाने बुजुर्ग को रोका, फिर गले से सोने की चेन झपटकर फरार हुए अपराधी
