19 साल बाद भी 80 में से केवल 19 एकड़ भूमि पर ही काबिज हो सका जैप-7, बटालियन के विकास पर लगा ब्रेक

हजारीबाग के पदमा में स्थित जैप-7 बटालियन को 2008 में 80 एकड़ भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन 19 साल बाद भी सिर्फ 19 एकड़ पर ही कब्जा है. भूमि की कमी के कारण बटालियन को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इसके विकास पर ब्रेक लग गया है.

हजारीबाग जिले के पदमा में झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) सात बटालियन को वर्ष 2008 में राज्य सरकार द्वारा 80 एकड़ भूमि आवंटित की गयी थी. हालांकि, भूमि आवंटन के करीब 19 वर्ष बाद भी बटालियन अब तक केवल लगभग 19 एकड़ भूमि पर ही कब्जा प्राप्त कर सकी है. विडंबना यह है कि आम लोगों को भूमि पर दखल दिलाने वाली पुलिस अपनी ही आवंटित करीब 61 एकड़ भूमि पर कब्जा नहीं दिला पायी है. इसी सीमित भूमि पर वर्ष 2021 में चारदीवारी और आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कर जैप-7 बटालियन को हजारीबाग से पदमा स्थानांतरित किया गया.

भूमि की कमी के कारण बटालियन को प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. पुलिसकर्मियों के लिए पर्याप्त आवास नहीं बन पा रहे हैं, खेल मैदान का अभाव है और प्रशिक्षण व अन्य आवश्यक सुविधाओं के विस्तार में भी बाधा आ रही है. बटालियन में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने से परिसर का समुचित विकास संभव नहीं हो पा रहा है.

80 एकड़ भूमि पर दखल दिलाने की मांग

वर्तमान कमांडेंट अविनाश कुमार ने इस समस्या से जिला प्रशासन को अवगत कराया है. उन्होंने हजारीबाग के उपायुक्त सहित विभाग के वरीय अधिकारियों को पत्र लिखकर बटालियन को आवंटित पूरी 80 एकड़ भूमि पर दखल दिलाने की मांग की है. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है.

पदमा और करमटांड़ मौजा की कुल 300 एकड़ भूमि आवंटित

पदमा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (जेएपीटीसी) को वर्ष 1981 में पदमा और करमटांड़ मौजा की कुल 300 एकड़ भूमि आवंटित की गयी थी. वर्ष 2004 में राज्य सरकार ने इसी भूमि में से करमटांड़ मौजा की 80 एकड़ जमीन जैप-7 बटालियन को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया. इसके बाद वर्ष 2008 में सरकार ने आधिकारिक रूप से यह भूमि जैप-7 को आवंटित कर दी. यह भूमि जेएपीटीसी के आवासीय परिसर के अंतिम छोर से पूर्व दिशा में एनएच-33 (वर्तमान एनएच-20) फोरलेन सड़क तक फैली हुई है. बीच में कुछ रैयती भूमि को छोड़कर आसपास की अधिकांश गैरमजरूआ जमीन इसमें शामिल है.


जैप-7 को आवंटित भूमि

भूमि आवंटित होने के बाद भी बटालियन पूरी जमीन पर कब्जा नहीं ले सकी. इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित आवंटित भूमि के बड़े हिस्से पर अतिक्रमण भी हो गया. मजबूरन बटालियन ने उपलब्ध 19 एकड़ भूमि पर ही चहारदीवारी और आवश्यक भवनों का निर्माण कर वर्ष 2021 में अपना संचालन शुरू किया.

क्या कहते हैं कमांडेंट

कमांडेंट अविनाश कुमार ने बताया कि पदस्थापन के बाद उन्हें जानकारी मिली कि 80 एकड़ आवंटित भूमि में से केवल 19 एकड़ पर ही बटालियन का कब्जा है. उन्होंने कहा कि पूर्व कमांडेंट ने भी इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखा था. उन्होंने स्वयं भी विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन को पत्र भेजकर पूरी भूमि पर दखल दिलाने का अनुरोध किया है. उनके अनुसार, उपायुक्त के निर्देश पर एसडीएम और अंचल अधिकारी ही दखल की प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि भूमि के अभाव में बटालियन को कई प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तथा इसके समुचित विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

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By Sanjay yadav

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