हजारीबाग. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा गुरुवार को वैदिक परंपराओं और भक्तिमय माहौल के बीच शहर के पीटीसी इस्कॉन से शुरू हुई. सुबह मंगला आरती के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ किया गया . इसके बाद पाहंडी की परंपरा निभायी गयी. हल्दिया से 20 सदस्यीय टीम पहांडी कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे , जिसका नेतृत्व आईआईटी-बीएचयू के टॉपर कुमार लीला प्रभु ने किया.जिसमें ढोल-नगाड़ों और हरिनाम संकीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को मंदिर से लयबद्ध ढंग से रथ तक लाया गया. इस दौरान पूरा परिसर जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए. इस बार रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण 40 फीट ऊंचा आधुनिक और रिमोट कंट्रोल से संचालित रथ था.रथ को मार्ग की आवश्यकता के अनुसार 16 फीट तक छोटा भी किया गया.रथ निर्माण मे इस्कॉन से जुड़े आईआईटीयन के द्वारा किया गया है . पूरी तरह हाईटेक तकनीक से तैयार यह रथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा. रथयात्रा से पहले छैरा पहरा की प्राचीन परंपरा भी निभायी गयी. इस अनुष्ठान में झाड़ू लेकर रथ के मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई की गयी तथा मार्ग पर चंदन मिश्रित जल का छिड़काव किया गया. श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक अनुष्ठान को श्रद्धा और उत्साह के साथ देखा गया.
रथयात्रा का मार्ग
रथयात्रा इस्कॉन मंदिर से शुरू होकर एसपी कोठी, सर्किट हाउस, जिला मोड़, पुराना बस स्टैंड, पीटीसी चौक होते हुए एसपी कोठी के सामने स्थित मैदान में संपन्न होगी. कई सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं की सहायता के लिए कई स्टाल लगाए थे. पुलिस विभाग के द्वारा रथ यात्रा में शामिल लोगों को पानी के बोतल वितरण किया.
हरिनाम संकीर्तन, मृदंग, झांझ और शंखनाद के बीच श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया. रथयात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया.
आयोजकों के अनुसार रथयात्रा में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की गयी थी. पूरे मार्ग पर भक्तों में भगवान जगन्नाथ के दर्शन को लेकर उत्साह देखने को मिला.
