हजारीबाग. नगर निगम क्षेत्र में बगैर नक्शा से निर्मित भवन का कानूनन नियमितिकरण किया जायेगा. इसे लेकर निगम ने झारखंड भवन नियमितिकरण योजना 2026 के तहत प्रक्रिया शुरू कर दी है. ऐसे मकान मालिक 25 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. यह आवेदन निगम से निबंधित आर्किटेक्ट एलटीपी के माध्यम से करना होगा. इस संबंध में नगर आयुक्त ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि शहर में कई ऐसे मकान हैं, जो नगर निगम से बिना नक्शा स्वीकृति के बनाये गये हैं. जो कानूनन अवैध हैं. इन मकानों को कानूनन नियमितिकरण करने के लिए सरकार की योजना है, इसका लाभ उठा सकते हैं. शहरी क्षेत्र में करीब 7.4 डिसमिल या 300 स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में बने हुए मकानों को भी स्वीकृति दी जायेगी. जी प्लस वन व जी प्लस टू भवनों को ही स्वीकृति मिलेगी. इससे अधिक मंजिला व क्षेत्रफल वाले भवनों पर यह योजना लागू नहीं है.
जी प्लस टू तक के भवन ही होंगे नियमित
वर्ष 2024 से पूर्व बने मकानों को कानूनन स्वीकृति दी जायेगी. इसमें जी प्लस टू भवन तक ही मान्य होगा. मकान निगम बिल्डिंग बाइलॉज के अनुसार निर्मित होना चाहिए. इसमें वाटर हार्वेस्टिंग, पार्किंग, कॉमर्शियल भवन में फायर सेफ्टी का होना जरूरी है. जिन मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग नहीं है, उसमें छह माह के अंदर वाटर हार्वेस्टिंग बनाना अनिवार्य होगा.
क्षेत्रफल के अनुसार देनी होगी नियमितिकरण फीस
बगैर नक्शा स्वीकृति के बने मकानों के कानूनन नियमितिकरण व नक्शा स्वीकृति के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा. इसके लिए आवासीय मकान मालिकों को 150 स्क्वायर मीटर से कम के भवन पर छह रुपये स्क्वायर फीट, 150 से 300 स्क्वायर मीटर में बने मकान के लिए नौ रुपये स्क्वायर फीट, वहीं व्यवसायिक मकान के लिए 150 स्क्वायर मीटर से कम क्षेत्रफल वाले भवन पर 12 रुपये स्क्वायर फीट और 150 से 300 स्क्वायर मीटर में बने भवन पर 18 रुपये स्क्वायर फीट शुल्क का भुगतान करना होगा.
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