चौपारण से अजय ठाकुर की रिपोर्ट
Hazaribagh Snakebite Case, हजारीबाग : हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत रेंबो करमा गांव में अंधविश्वास के कारण एक ऐसी दुखद घटना घटी, जिसने समाज को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है. दरअसल यहां सर्पदंश (सांप काटने) के बाद एक मासूम बच्चे की जान बचाने की अंधी उम्मीद में पूरा परिवार डॉक्टरों द्वारा आधिकारिक रूप से मृत घोषित किए जाने के बावजूद, शव को करीब 12 घंटों तक तांत्रिक और ओझा के झाड़-फूंक के भरोसे रखा गया. यह मामला रेंबो करमा गांव के निवासी अरविंद रविदास के घर का है, जहां उनके 13 वर्षीय बेटे ऋषि कुमार की सांप के काटने और समय पर सही इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई. यह वाकया पूरे क्षेत्र में भारी चर्चा और आत्ममंथन का विषय बना हुआ है.
मुंह से फेन निकलता देख कोडरमा भागे परिजन
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात अरविंद रविदास का पूरा परिवार अपने घर में सोया हुआ था. इसी बीच आधी रात को एक जहरीला सांप घर के भीतर घुस आया और बिस्तर पर सो रहे अरविंद के 13 वर्षीय पुत्र ऋषि कुमार को डंस लिया. इसी दौरान अचानक अरविंद की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि एक सांप रेंगते हुए घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है. अरविंद के शोर मचाने पर घर के बाकी सदस्य भी जाग गए और आनन-फानन में सभी ने मिलकर उस सांप को मार डाला और साक्ष्य मिटाने के लिए उसे तुरंत जला भी दिया. उस वक्त तक परिवार के किसी भी सदस्य को यह आभास तक नहीं था कि सांप ने सोते हुए ऋषि को अपना शिकार बना लिया है. कुछ देर बाद जब घरवाले ऋषि को जगाने उसके पास गए, तो देखा कि वह अचेत पड़ा है और उसके मुंह से लगातार फेन (झाग) निकल रहा है. यह देखते ही घर में चीख-पुकार मच गई और यह खबर गांव में आग की तरह फैल गई.
दो-दो अस्पतालों ने किया मृत घोषित
गांव में मची अफरा-तफरी के बीच परिजन अचेत ऋषि को लेकर तुरंत नजदीकी सदर अस्पताल कोडरमा भागे. वहां के डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद ऋषि को ‘ब्रॉट डेड’ यानी मृत घोषित कर दिया. इसके बावजूद परिवार वालों का दिल इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ. वे डॉक्टरों की बात को अनसुना कर ऋषि के शव को लेकर तुरंत बरही के एक अन्य निजी चिकित्सक के पास पहुंचे. वहां भी जांच के बाद डॉक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि बच्चे के शरीर में जहर फैल चुका है और उसकी मौत हो चुकी है. दो-दो चिकित्सा संस्थानों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद भी, परिजनों की आंखों पर अंधविश्वास का चश्मा चढ़ा रहा. वे शव को लेकर घर आ गए और किसी तांत्रिक के बहकावे में आकर पूरे 12 घंटे तक तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का तमाशा करवाते रहे कि बच्चा दोबारा जिंदा हो जाएगा. आखिरकार, जब शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ गया, तब जाकर परिजनों ने हार मानी.
तंत्र मंत्र का तमाशा देखने के लिए जुटी रही भीड़
तांत्रिक के तंत्र-मंत्र का यह पूरा तमाशा देखने के लिए गांव में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी रही, लेकिन दुर्भाग्यवश किसी ने भी इस अंधविश्वास का पुरजोर विरोध नहीं किया. यह घटना आज के डिजिटल युग में भी ग्रामीण इलाकों में फैली अशिक्षा और अंधविश्वास की जड़ों को उजागर करती है. बुद्धिजीवियों और स्थानीय जागरूक लोगों का कहना है कि यदि सांप के डंसने तुरंत बाद ही बच्चे के शरीर की जांच कर ली जाती और तांत्रिकों के चक्कर में समय बर्बाद करने के बजाय उसे सीधे बड़े अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) का इंजेक्शन दिलवाया जाता, तो शायद आज ऋषि की जान बचाई जा सकती थी. यह दुखद घटना पूरे समाज के लिए एक सबक है कि सांप के काटने पर ओझा-गुणी नहीं, बल्कि केवल अस्पताल की दवा ही जान बचा सकती है.
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