हजारीबाग कोर्ट में ₹1, ₹2 और ₹5 के कोर्ट फी टिकटों की भारी किल्लत, वकील और मुवक्किल परेशान

हजारीबाग कोर्ट में ₹1, ₹2, ₹5 के कोर्ट फी टिकटों की भारी कमी. जमानत, वकालतनामा जैसे काम रुके, बार एसोसिएशन नाराज। जानें पूरा मामला.

हजारीबाग. व्यवहार न्यायालय में ₹1, ₹2 और ₹5 के कोर्ट फी टिकटों की भारी किल्लत है. इस वजह से वकील और मुवक्किल रोजाना बड़ी परेशानी झेल रहे हैं. नकल निकलवाने से लेकर जमानत याचिका, हाजिरी पिटीशन, बेल बॉन्ड, वकालतनामा और शपथ पत्र दाखिल करने तक के हर छोटे-बड़े काम के लिए इन छोटे टिकटों की अनिवार्य जरूरत पड़ती है. इधर, स्थानीय वेंडर अपने पास स्टॉक उपलब्ध न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं.

कोषागार के अधीन है सप्लाई सिस्टम, बार एसोसिएशन ने जताई नाराजगी

कोर्ट फी टिकट की सप्लाई का पूरा सिस्टम जिला कोषागार (ट्रेजरी) के अधीन आता है और यह झारखंड सरकार के राजस्व विभाग के माध्यम से जिला कोषागार तक पहुँचता है. इसके बाद कोषागार पदाधिकारी निबंधित स्टांप वेंडरों को मांग के अनुसार टिकट आवंटित करते हैं. बार एसोसिएशन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि इस कमी को लेकर जिला प्रशासन को कई बार सूचित किया गया,

लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. उल्लेखनीय है कि कोर्ट फी से सरकार को हर साल बड़ा राजस्व मिलता है और सरकार ई-कोर्ट फी को सुलभ बनाने पर भी विचार करती रहती है.

जिला कोषागार पदाधिकारी ने दी सफाई, भेजी गई नई डिमांड

दूसरी ओर, इस पूरी समस्या पर सफाई देते हुए जिला कोषागार पदाधिकारी ने स्वीकार किया कि फिलहाल कई कोर्ट फी टिकटों का स्टॉक खत्म है. उन्होंने जानकारी दी कि टिकटों की आपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को मांग पत्र (डिमांड) भेज दिया गया है, ताकि जल्द से जल्द किल्लत को दूर किया जा सके.

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By Arif

हजारीबाग के आरिफ पिछले 26 वर्षों से प्रभात खबर के साथ निष्पक्ष, जनसरोकार एवं जमीनी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. हजारीबाग में खासकर शिक्षा विभाग मतलब सरकारी स्कूल के कक्षा एक से 12वीं तक की विभिन्न विषयों पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं. इसके अलावा कमिश्नरी ऑफिस, इंजीनियरिंग विभाग, पशुपालन विभाग, बंदोबस्त कार्यालय, आरटीओ, डीटीओ दोनों कार्यालय और जिला निबंधन कार्यालय से जुड़ी खबरों पर लगातार फोकस करते आ रहे हैं.

सामाजिक और राजनीति सरोकार से जुड़े विषयों में उनकी विशेष रूचि रही है. पत्रकारिता करने के दौरान कई राजनीतिक व्यक्तित्व, कवि, रचनाकार व लेखक से मिलना भी उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं. झारखंड अलग होने से पहले प्रभात खबर में पत्रकारिता की शुरुआत चतरा जिले के टंडवा प्रखंड से की थी. तब पत्रकारिता में कई चुनौतियां थीं. इनका लगातार सामना करते हुए आज एक सफल पत्रकारिता के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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