Hazaribagh News: झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग की अधिसूचना जारी होने के बावजूद कई जिलों में कनीय स्तर के अभियंता अब भी प्रभारी जिला अभियंता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि कार्यपालक अभियंता से कनीय स्तर के अभियंताओं को जिला अभियंता के प्रभार से मुक्त कर उन्हें उनके मूल पद पर ही कार्यरत माना जायेगा. इसके साथ ही संबंधित जिलों में विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता स्तर के अभियंता को जिला अभियंता का प्रभार सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था. बावजूद इसके अब तक कई जिलों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकी है.
पंचायती राज विभाग ने जारी की थी अधिसूचना
झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने जिला परिषद कोषांग में कार्यरत अभियंताओं के पदस्थापन और प्रभार को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. वित्त विभाग के 19 मई 2026 के परिपत्र के आलोक में जारी अधिसूचना में जिला परिषदों में प्रभारी जिला अभियंता के रूप में काम कर रहे अधिकारियों की स्थिति को स्पष्ट किया गया है. इस प्रस्ताव को विभागीय मंत्री की स्वीकृति भी प्राप्त है. विभाग का यह निर्णय जिला परिषदों में अभियंताओं के पद और उन्हें सौंपे गये प्रभार के बीच स्पष्टता लाने के उद्देश्य से लिया गया है. सरकार ने अधिकारियों की जिम्मेदारी उनके मूल पद और स्तर के अनुरूप निर्धारित करने की कोशिश की है.
कार्यपालक अभियंता को देना है जिला अभियंता का प्रभार
विभागीय अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जिन जिलों में जिला परिषद कोषांग के सहायक अभियंता को प्रभारी जिला अभियंता बनाया गया है, वहां पदस्थापित विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता स्तर के अभियंता को जिला अभियंता का प्रभार सौंपने संबंधी आदेश निर्गत किया जायेगा. इसका सीधा अर्थ है कि सहायक अभियंता या कार्यपालक अभियंता से कनीय स्तर के अभियंता को प्रभारी जिला अभियंता की जिम्मेदारी में रखने की व्यवस्था अब समाप्त की जानी है. जिला अभियंता का प्रभार वरिष्ठ स्तर के कार्यपालक अभियंता को दिया जाना है. संबंधित अधिकारियों को इस कार्रवाई की सूचना विभाग को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
अधिसूचना जारी होते ही समाप्त हो गयी प्रभारी व्यवस्था
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अभियंता कार्यपालक अभियंता से कनीय स्तर के हैं और प्रभारी व्यवस्था के तहत जिला अभियंता के पद पर कार्य कर रहे हैं, वे संबंधित जिले में अपने मूल पद पर ही कार्यरत माने जायेंगे. यानी अधिसूचना जारी होने की तिथि से ही प्रभारी जिला अभियंता के रूप में उन्हें मिली जिम्मेदारी और शक्तियां समाप्त मानी गयी हैं. उनका मूल कोटि, यानी सहायक अभियंता का पद ही प्रभावी रहेगा. ऐसे में जिला अभियंता के पद से जुड़ी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल उनके द्वारा किया जाना विभागीय निर्देश की भावना के विपरीत माना जा रहा है.
कई जिलों में अब तक नहीं बदली व्यवस्था
सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद भी झारखंड के कई जिलों में विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को जिला अभियंता का प्रभार नहीं सौंपा गया है. इसके कारण पहले से प्रभारी व्यवस्था में काम कर रहे सहायक अभियंता ही जिला अभियंता से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं. स्थिति यह है कि जिन अधिकारियों की प्रभारी जिला अभियंता के रूप में शक्तियां समाप्त हो चुकी हैं, वे अब भी जिला परिषद के कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. इससे सरकार के स्पष्ट निर्देश के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. आदेश जारी होने के बाद भी व्यवस्था में बदलाव नहीं होना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मामला माना जा रहा है.
बिना वित्तीय शक्ति के वित्तीय दायित्व निभाने का आरोप
सबसे महत्वपूर्ण सवाल वित्तीय दायित्वों को लेकर उठ रहा है. उपलब्ध स्थिति के अनुसार कुछ जिलों में सहायक अभियंता और प्रभारी जिला अभियंता के रूप में काम कर रहे कनीय स्तर के अभियंता बिना वित्तीय शक्तियों के ही वित्तीय दायित्वों का निष्पादन कर रहे हैं. जब अधिसूचना के तहत उनकी जिला अभियंता के रूप में शक्तियां स्वत: समाप्त हो गयी हैं, तब उनके द्वारा वित्तीय दायित्व का निर्वहन किये जाने की स्थिति सवालों के घेरे में है. इसे वित्त विभाग के निर्देशों का उल्लंघन बताया जा रहा है. ऐसी स्थिति में संबंधित कार्यों और वित्तीय निर्णयों की वैधानिकता को लेकर भी प्रश्न खड़े हो सकते हैं.
सरकार के आदेश के अनुपालन पर उठ रहे सवाल
पंचायती राज विभाग ने अधिसूचना के जरिये व्यवस्था स्पष्ट कर दी है. कनीय अभियंताओं को मूल पद पर रहना है और कार्यपालक अभियंता स्तर के अधिकारियों को जिला अभियंता का प्रभार सौंपना है. संबंधित अधिकारियों को विभाग को कार्रवाई की सूचना भी देनी है. इसके बावजूद यदि कई जिलों में पुरानी व्यवस्था जारी है, तो सवाल यह है कि विभागीय आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किस स्तर पर है.
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प्रशासनिक व्यवस्था में बनी है भ्रम की स्थिति
जिला परिषदों में अभियंताओं की पदस्थापना और वित्तीय अधिकारों को लेकर सरकार के आदेश का स्पष्ट अनुपालन नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. खासकर तब, जब अधिसूचना में प्रभारी कनीय अभियंताओं की शक्तियां समाप्त होने की बात स्पष्ट रूप से कही गयी है. ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायती राज विभाग इस स्थिति में क्या कार्रवाई करता है और कब तक सभी जिलों में कार्यपालक अभियंता स्तर के अधिकारियों को जिला अभियंता का प्रभार सौंपकर सरकारी आदेश को पूरी तरह लागू कराया जाता है.
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