हजारीबाग से जयनारायण की रिपोर्ट
Hazaribagh News: हजारीबाग जिले में बच्चों को डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के उद्देश्य से बुधवार को डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा (स्टॉप डायरिया कैंपेन) की शुरुआत की गई. सदर अस्पताल सह शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) से प्रभात फेरी निकालकर अभियान का शुभारंभ किया गया. यह विशेष अभियान 31 अगस्त तक पूरे जिले में चलाया जाएगा. इसके तहत पांच वर्ष तक के बच्चों को ओआरएस और जिंक की गोलियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ लोगों को स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक किया जाएगा.
प्रभात फेरी के साथ अभियान की शुरुआत
अभियान का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशि जायसवाल, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. कपिल मुनी प्रसाद और जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. सुभाष प्रसाद ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर किया. प्रभात फेरी के माध्यम से लोगों को डायरिया से बचाव के उपायों और समय पर इलाज के महत्व की जानकारी दी गई. स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि बरसात के मौसम में डायरिया के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका रहती है. ऐसे में समय पर जागरूकता और प्राथमिक उपचार से बच्चों की जान बचाई जा सकती है.
जिला स्तरीय कार्यशाला में दिए गए निर्देश
प्रभात फेरी के बाद सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया. सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि जहां भी डायरिया के मामले सामने आएं, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल पहुंचकर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए और बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए.
दस्त होने पर तुरंत दें ओआरएस और जिंक
कार्यशाला में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी बच्चे को दस्त हो जाए तो उसे तुरंत ओआरएस का घोल पिलाना चाहिए. इसके साथ ही लगातार 14 दिनों तक जिंक की गोली देना बेहद जरूरी है. इससे शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी पूरी होती है तथा बच्चे के जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है. विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि दस्त होने पर घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और चिकित्सकीय सलाह लें.
स्वच्छता और पोषण पर रहेगा विशेष फोकस
अभियान के दौरान लोगों को डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छ पेयजल का उपयोग, भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने, समय पर टीकाकरण और बच्चों को विटामिन-ए की निर्धारित खुराक दिलाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन साधारण लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाकर डायरिया के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है.
सहिया घर-घर पहुंचाएंगी ओआरएस और जिंक
जिला कार्यक्रम प्रबंधक समरेश कुमार सिंह ने बताया कि जुलाई और अगस्त के दौरान जिले की सभी सहिया कार्यकर्ता घर-घर जाकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए दो पैकेट ओआरएस और 14 जिंक टैबलेट उपलब्ध कराएंगी. साथ ही अभिभावकों को इनके सही उपयोग की जानकारी भी देंगी. उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में डायरिया के मामले अधिक सामने आएंगे, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य टीमों की तैनाती भी की जाएगी.
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प्रभावित क्षेत्रों में होगा ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डायरिया की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा. साथ ही पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि बच्चों में दस्त, उल्टी या निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतें और तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें. समय पर ओआरएस, जिंक और उचित उपचार से डायरिया से होने वाली गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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