कटकमसांडी: कटकमदाग प्रखंड के ढेंगुरा गांव में रहने वाले बिरहोर परिवार इन दिनों मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. यहां करीब 16 बिरहोर परिवार रहते हैं, जो मजदूरी कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, बिरहोर टंडा में लगा जलमीनार कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे पेयजल के लिए परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
बिरहोर टंडा में स्थापित स्वास्थ्य उपकेंद्र भी लंबे समय से बंद पड़ा है. देखरेख के अभाव में स्वास्थ्य उपकेंद्र के परिसर में घास, झाड़ियां और भूसा उग आया है. ऐसे में स्थानीय लोगों को इलाज के लिए दूसरी जगह जाना पड़ रहा है.
आवास बने, लेकिन दरवाजा-खिड़की नहीं लगे
स्थानीय लोगों के अनुसार, कटकमदाग प्रखंड प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण कई बिरहोर परिवार अब भी प्लास्टिक की झुग्गी बनाकर रहने को मजबूर हैं. वर्ष 2023-24 में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर योजना के तहत दर्जनों आवासों का निर्माण कराया गया था, लेकिन कई घरों में अब तक खिड़की और दरवाजे नहीं लगाए गए हैं.
दरवाजा-खिड़की नहीं होने के कारण बिरहोर परिवार के लोग घर के अंदर रहने के बजाय बाहर सोने को मजबूर हैं. बरसात के मौसम में सांप और बिच्छू के काटने का खतरा भी बना रहता है. इससे परिवारों की परेशानी और बढ़ गयी है.
मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
भाजपा नेता पीयूष राणा ने उपायुक्त से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि आदिम जनजाति बिरहोर परिवारों की स्थिति चिंताजनक है. प्रशासन को तत्काल खराब जलमीनार की मरम्मत कराने, बंद स्वास्थ्य उपकेंद्र को चालू करने और अधूरे आवासों में खिड़की-दरवाजे लगवाने की दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि बिरहोर परिवारों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मिल सकें.
