गाजर घास से रहें सावधान! आइसीएआर ने बच्चों को बताए नुकसान और बचाव के तरीके

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय खेरौन में गाजर घास के खतरे पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। छात्रों और शिक्षकों को इस हानिकारक खरपतवार के नुकसान और पहचान के बारे में जानकारी दी गई।

बरही: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोरियाकरमा की ओर से राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय खेरौन में गाजर घास को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में संस्थान के परिसर प्रभारी डॉ. एसके महंता, डॉ. वंदना और डॉ. काशीनाथ ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को गाजर घास से होने वाले नुकसान की जानकारी दी.

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजर घास एक हानिकारक खरपतवार है, जिसका वानस्पतिक नाम पार्थेनियम है. यह फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में त्वचा संबंधी रोग, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है.

बच्चों को करायी गाजर घास की पहचान

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को गाजर घास की पहचान करायी. उन्होंने कहा कि इसके प्रसार को रोकने के लिए समय रहते इसकी पहचान कर इसे हटाना जरूरी है. वैज्ञानिकों ने विद्यालय परिसर के साथ-साथ खेतों में भी गाजर घास को हटाने और इसके प्रति आसपास के लोगों को जागरूक करने की अपील की.

कार्यक्रम में डॉ. आशा कुमारी, डॉ. नुजैबा, विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी मौजूद थे.


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By वैभव विक्रम

वैभव विक्रम डिजिटल पत्रकार हैं. बीते 5 सालों से झारखंड की सामाचार, खेल, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, धर्म में रुचि है और इसी विषय पर अपने विचार प्रकट करना पसंद है. वर्तमान में प्रभात खबर के झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के जिलों की खबरों को कवर कर रहे हैं. इससे पहले वह साल 2023-24 में प्रभात खबर के खेल डेस्क की खबरें लिखा करते थे.

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