आदिवासी जन आक्रोश महारैली में उमड़ा जनसैलाब

हक-अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी : निशा भगत

हजारीबाग. कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में हजारीबाग के सरहुल मैदान में सोमवार को आदिवासी केंद्रीय सरना समिति की अगुवाई में आदिवासी जन आक्रोश महारैली का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष महेंद्र बैक ने की. संचालन कार्यकारी अध्यक्ष मनोज टुडू, पवन तिग्गा, विक्की कुमार धान, मनोज भोक्ता, विजय भोक्ता, सहदेव किस्कू और फुलवा कच्छप ने संयुक्त रूप से किया. रैली में हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और रांची जिले से आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक पोशाक और वाद्य यंत्रों के साथ सरहुल मैदान में जुटे. निर्धारित मार्ग के अनुसार जुलूस सरहुल मैदान से निकलकर पंच मंदिर, झंडा चौक, इंद्रपुरी चौक, जिला चौक, बिरसा मुंडा चौक और सिदो-कान्हू चौक होते हुए पुनः सरहुल मैदान लौटा. सभा में कई वक्ताओं ने कुड़मी समुदाय की एसटी में शामिल करने की मांग को राजनीतिक प्रयास बताते हुए विरोध दर्ज कराया.

राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को 14 सूत्री मांग पत्र सौंपा

ज्योत्सना केरकेट्टा ने कहा कि कुड़मी समुदाय अवसरवादी है. लाभ जहां दिखायी देता है, उसी दिशा में मुड़ जाता है. केंद्रीय महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की आवाज कोई दबा नहीं सकता. हक-अधिकार की लड़ाई निरंतर जारी रहेगी. शशि पन्ना ने कहा कि संविधान के विभिन्न विभागों ने पहले भी यह मांग खारिज की है. इतिहास में भी आदिवासी व कुर्मी समुदायों में समानता नहीं पायी जाती. फूलचंद तिर्की ने कहा कि कुड़मी और कुर्मी एक ही समुदाय है. कुर्मी समाज के लोग कुड़मी नाम देकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. सचिव सह मीडिया प्रभारी विक्की कुमार धान ने कहा कि यह मांग आदिवासी समाज की एकता और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है. आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है. किसी भी गलत प्रयास का विरोध करेगा. महासचिव संजय तिर्की ने जन सैलाब को आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रमाण बताया. महारैली के बाद आदिवासी केंद्रीय सरना समिति ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को 14 सूत्री मांग पत्र सौंपा.

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Author: SUNIL PRASAD

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