हजारीबाग : शहरी क्षेत्र में मांस-मछली, चिकेन समेत अन्य व्यवसाय के लिए नगर निगम लाइसेंस जारी करेगा. व्यवसाय के लिए अब तक निगम की ओर से 32 लाइसेंस दिया गया है, लेकिन किसी भी लाइसेंस का अब तक नवीकरण नहीं हुआ है.
लाइसेंस रिन्युअल के लिए कार्यपालक पदाधिकारी आशीष कुमार ने इस्तेहार जारी किया है और इसकी सूचना व्यवसायियों को दी है. व्यवसायियों को नगर निगम में उपलब्ध फॉर्म लेकर आवेदन जमा करना है. झारखंड म्युनीशिपल एक्ट-2011 के धारा 155, 310, 322 और 464 के तहत मीट-मछली व चिकेन की बिक्री के लिए किसी को भी एक साल के लिए लाइसेंस मिलेगा. लाइसेंस लेने का शुल्क एक हजार रुपये देय है. दुकान से प्रति फीट 15 रुपये किराया नगर निगम को अलग से सलाना देना होगा. एक साल बाद लाइसेंस को रिन्युअल कराने में 700 रुपया शुल्क जमा करना होगा.
नगर निगम कार्यालय के सिंगल विंडो में 50 रुपये जमा कर फॉर्म लिया जा सकता है फार्म में मांस-मछली व चिकेन बेचनेवाले को कई जानकारी देनी होगी. शपथ पत्र होल्डिंग नंबर के साथ देना होगा. इसमें कई नियमों का पालन करना होगा. ऐसे दुकानों के लिए शटर व जलापूर्ति की व्यवस्था, कच्चा-पक्का मकान की जानकारी, मीट रखनेवाले स्थान पर कांच के घेरे की व्यवस्था, गंदे पानी निकासी की व्यवस्था आदि शर्तों को पूरा करना होगा. इन सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ही लाइसेंस निर्गत होगा. मामूली व्यवसायियों की परेशानी यह है उन्हें प्लॉट नंबर, वार्ड नंबर, टीन नंबर, होल्डिंग नंबर, पेन कार्ड, आइ कार्ड, सेल टेक्स नंबर देना होगा. इतना कागजात तत्काल व्यवसायी उपलब्ध नहीं कर पा रहे हैं.
दंड का प्रावधान
बिना लाइसेंस के मीट-मछली व चिकेन बेचने पर नगरपालिका एक्ट के तहत दंड का भी प्रावधान है. दोषियों को दो हजार रुपया दंड देने का प्रावधान है. मिलावटी और बीमार पशु के मांस बेचने पर भी दंड का प्रावधान है.
एनओसी लेना होगा
मीट विक्रेता को लाइसेंस लेते समय आवेदन के साथ वार्ड पार्षद, स्थानीय व्यक्तियों से दुकान खोलने के लिए एनओसी पत्र सौंपना जरूरी है. एनओसी नहीं देने पर लाइसेंस निर्गत नहीं होगा.
