..बनई गांव में 151 वर्षो से हो रही मां दुर्गा की पूजा

बसिया प्रखंड के बनई में 151 वर्षो से मां दुर्गा की पूजा होते आ रही है

: नवमी को बकरे व दशमी को भैंसे की बलि दी जाती है. कमलेश साहू, बसिया बसिया प्रखंड के बनई में 151 वर्षो से मां दुर्गा की पूजा होते आ रही है. प्रखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर सुदूरवर्ती गांव एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद भी लोगों की आस्था देखने लायक है. यहां शुरू से ही विजया दशमी को भैंसा की बलि देने की परंपरा है. जो आज भी कायम है. दुर्गा पूजा की शुरुआत गांव के जमींदार गोविंद मोहन राय ने की थी. उनके पुत्र दिगंबर मोहन राय व उनके पौत्र आनंद मोहन राय द्वारा पूजा का आयोजन होता रहा. लगभग 50 वर्षो तक आनंद मोहन राय दुर्गा पूजा विधि विधान से आयोजन करते रहे. इसके बाद परवल सिंह 30 वर्षो तक दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष थे. वर्तमान में रविंद्र नाथ बीसी दो दशक से पूजा समिति के अध्यक्ष है. रवींद्र नाथ बीसी ने बताया कि पांडेय गोबिंद मोहन राय के पूर्वजो का सपना था कि दुर्गा मंदिर परिसर में राधा कृष्ण की मंदिर निर्माण कर मूर्ति की स्थापना की जाये और दुर्गा मंदिर परिसर में राधा कृष्ण का मंदिर का निर्माण कराया गया. जब से इस गांव में दुर्गा पूजा आरंभ हुआ. तब से पशु बलि की प्रथा कायम है. नवमी को बकरा बलि दी जाती है. दशमी को भैसा की बलि दी जाती है. ग्रामीणों का मानना है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. इसलिए असुरी शक्ति के विनाश के लिए भैसे की बलि दी जाती है. यहां भैसे की बलि देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है. यहां होने वाली दुर्गा पूजा व पशु बली दूर दूर तक चर्चा हैं. वहीं भगवान के प्रति आस्था के कारण पूरे क्षेत्र के लोग पूजा को लेकर समर्पित रहते हैं. वहीं मान्यता यह भी हैं कि दुर्गा पूजा के दौरान यहां लोगों की मांगी जाने वाली हर मनोकामना पूरी होती हैं.

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Author: VIKASH NATH

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