52 साल से बॉक्साइट खनन, फिर भी गांवों में सुविधाएं नहीं, हिंडाल्को के खिलाफ हजारों ग्रामीणों ने रोका ट्रक

गुमला में बॉक्साइट खनन के विरोध में 60 गांवों के ग्रामीणों ने मोर्चा खोला. बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर ट्रकों का परिचालन ठप कर दिया है.

गुमला. घाघरा थाना क्षेत्र के देवाकी धाम के समीप सोमवार को बॉक्साइट खनन से प्रभावित करीब 50 से 60 गांवों के हजारों महिला-पुरुषों ने हिंडाल्को के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया. ग्रामीणों ने बॉक्साइट लदे ट्रकों का परिचालन रोक दिया, जबकि अन्य वाहनों का आवागमन सामान्य रहा. ग्रामीणों ने आंदोलन स्थल पर तंबू गाड़ दिया है और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है.

52 वर्षों से खनन, सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि हिंडाल्को पिछले 52 वर्षों से क्षेत्र से बॉक्साइट का खनन कर बाहर ले जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं हुआ. जर्जर सड़कों के कारण गांवों तक एंबुलेंस पहुंचना मुश्किल है. मरीजों और गर्भवती महिलाओं को प्रखंड मुख्यालय ले जाने में परेशानी होती है. ग्रामीणों ने दावा किया कि इस वजह से कई बार मौत भी हुई है.

ग्रामीणों ने इटकीरी से सेरेंगदाग होते हुए खनन क्षेत्र के गांवों तक सड़क निर्माण, बिजली, पेयजल, स्कूल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि ये मांगें करीब पांच दशक पुरानी हैं. कई बार सड़क जाम, हिंडाल्को कार्यालय में तालाबंदी और खनन-परिवहन रोकने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ.

कंपनी और प्रशासन के बीच फंसे ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, हिंडाल्को से विकास कार्यों की मांग करने पर कंपनी रॉयल्टी देने और उससे प्रशासन द्वारा सड़क व अन्य कार्य कराने की बात कहती है. वहीं, प्रशासन के पास जाने पर उन्हें खनन क्षेत्र का मालिक बताते हुए कंपनी से विकास कराने को कहा जाता है. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी और प्रशासन के बीच की इस खींचतान में वे वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं.

रात में पुरुष, दिन में महिलाएं रहेंगी धरने पर

सूचना मिलने पर थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया. हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे. उन्होंने आर-पार की लड़ाई लड़ने की बात कही और उपायुक्त समेत संबंधित अधिकारियों को आंदोलन की जानकारी दी.

आंदोलन स्थल पर ग्रामीण सामूहिक रूप से खिचड़ी बना रहे हैं. तय किया गया है कि महिलाएं रात में घर लौटेंगी, जबकि पुरुष रातभर धरने पर रहेंगे. सुबह महिलाएं फिर आंदोलन में शामिल होंगी.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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