जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
गुमलाः जिले के कई प्राचीन शिव मंदिर सावन माह में श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं. कपिलनाथ, कमलपुर, महा सदाशिव और महादेव कोना मंदिर में सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं. सावन की चौथी सोमवारी को लेकर मंदिर समितियों की ओर से विशेष तैयारियां की गई हैं.
सिसई : प्राचीन है कपिलनाथ शिव मंदिर
संवत 1739 में राम साह और रघुनाथ साह द्वारा निर्मित नगर नवरत्नगढ़ का ऐतिहासिक कपिलनाथ शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है. यहां वर्षभर श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सावन माह में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है. पोटरो स्थित बूढ़ा महादेव और मुरगू गांव स्थित चिरैयाधाम में भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. सावन में यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
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भरनो : कमलपुर मंदिर में उमड़ रहे शिवभक्त
भरनो प्रखंड के कमलपुर गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया था. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा-अर्चना करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वर्षभर लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचते हैं, जबकि सावन माह में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है. चौथी सोमवारी को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं.
रायडीह : महासदाशिव मंदिर बना आस्था का केंद्र
रायडीह प्रखंड के मरदा गांव स्थित महा सदाशिव मंदिर पूरे जिले में आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर में भगवान शिव की 52 भुजाओं वाली प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. चौथी सोमवारी को लेकर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है. मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है.
बसिया : महादेव कोना में हैं सैकड़ों शिवलिंग
बसिया प्रखंड का प्रसिद्ध महादेव कोना शिव मंदिर अपनी धार्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है. बुजुर्गों के अनुसार, यहां मौजूद शिवलिंगों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था. मंदिर परिसर में पत्थरों पर बनी विभिन्न आकृतियां भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. यहां सैकड़ों शिवलिंग मौजूद हैं.
पहाड़ और जंगल से घिरा महादेव कोना प्राकृतिक रूप से भी बेहद रमणीय है. मंदिर रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सावन माह में यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
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