कलाकारों व गायकों की कमी नहीं, जरूरत है तो बस अवसर और मंच की

कलाकारों व गायकों की कमी नहीं, जरूरत है तो बस अवसर और मंच की

प्रेमप्रकाश भगत, डुमरी(गुमला) चैनपुर अनुमंडल क्षेत्र में स्थानीय कलाकारों व गायकों की प्रतिभा खोज तथा उनके सामाजिक व आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर डुमरी प्रखंड में चैनपुर अनुमंडल के बुद्धिजीवी वर्गों के बीच प्रभात खबर परिचर्चा कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम में अनुमंडल क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, व बुद्धिजीवी वर्ग के लोग शामिल हुए. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि चैनपुर अनुमंडल क्षेत्र में प्रतिभाशाली स्थानीय कलाकारों व गायकों की कोई कमी नहीं है. वक्ताओं ने उन्हें उचित मंच और अवसर देने की जरूरत पर बल दिया, ताकि वे अपनी कला और प्रतिभा को समाज के सामने प्रस्तुत कर सकें. वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे प्रतिभाशाली कलाकार और गायक हैं , जो संसाधनों और अवसरों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन और मंच मिले तो वे न केवल क्षेत्र, बल्कि जिला व राज्य से लेकर राष्ट्र स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं. वक्ताओं ने प्रखंड स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभाओं को सामने लाने की पहल करने की आवश्यकता बतायी. समाजसेवी जगरनाथ भगत ने कहा कि हमारे प्रखंड में कई ऐसे युवा कलाकार हैं. जिनमें गाने-बजाने की अद्भुत प्रतिभा है. लेकिन उन्हें अपनी कला दिखाने के लिए सही मंच नहीं मिल पाता है. यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो इन कलाकारों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है. जगरनाथ भगत इग्नासियुस मिंज ने कहा कि स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा देने से हमारी संस्कृति और परंपरा सुरक्षित रहेगी. गांवों में लोकगीत और पारंपरिक संगीत की समृद्ध परंपरा रही है. जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना चाहिये. प्रशिक्षण मंच व संसाधन जरूरी है. इग्नासियुस मिंज फिरासत अली ने कहा कि प्रतिभा किसी एक वर्ग या क्षेत्र की नहीं होती, बल्कि हर समाज में छिपी होती है. जरूरत है तो बस उसे पहचानने और निखारने की. वे कहते हैं कि यदि स्थानीय स्तर पर कलाकारों को मंच दिया जाये,-ृ तो वे अपनी कला के माध्यम से समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं. प्रमोद खलखो ने कहा कि सरकार की कई योजनाएं कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए चलायी जाती हैं. यदि प्रखंड स्तर पर प्रतिभाशाली कलाकारों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाया जाये तो वे सरकारी मंचों तक भी पहुंच सकते हैं. इससे उनकी सामाजिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है. प्रमोद खलखो जोय कुजूर ने कहा कि प्रखंड क्षेत्र में छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास किया जाये और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाये. ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें और समाज में अपनी पहचान बना सकें. जोय कुजूर ब्रजेंद्र पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में कलाकारों की कमी नहीं है. कलाकार और गायक समाज की संस्कृति और परंपराओं के वाहक होते हैं. उनके गीत-संगीत और कला के माध्यम से समाज की पहचान और संस्कृति जीवित रहती है. इसलिए जरूरी है कि कलाकारों के सामाजिक और आर्थिक जीवन को मजबूत किया जाये. ब्रजेंद्र पांडेय बयास खान कहते हैं कि आने वाला समय में अनुमंडल क्षेत्र विभिन्न गांवों में जाकर स्थानीय कलाकारों और गायकों की खोज की जायेगी तथा उन्हें मंच देने के लिए सांस्कृतिक कार्यकर्मों का आयोजन किया जायेगा. कार्यकर्मों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लें. बयास खान चैनपुर के ज्योति कुजूर ने कहा है कि सरकार को कलाकारों के लिए कानून बनानी चाहिए. साथ ही कलाकारों को प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाया. ताकि कलाकार अपनी प्रतिमा के बल पर आगे बढ़ सके. गुमला का चैनपुर अनुमंडल क्षेत्र में कलाकारों की कोई कमी नहीं है. लेकिन मंच नहीं मिलने के कारण प्रतिभा कुंठित हो रही है. ज्योति कुजूर

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By Akarsh aniket

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