बाल सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में बेहतरीन रहा साल 2025

गुमला जिले में प्रशासन के सहयोग से रोके गये 25 बाल विवाह व मानव तस्करों की चंगुल से मुक्त कराये गये पांच बच्चे

गुमला. बाल सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में 2025 गुमला जिले के लिए बेहतरीन साल रहा है. जिला प्रशासन के समन्वय से काम करते हुए नागरिक समाज संगठन लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान गुमला ने 30 बच्चों को बाल विवाह व ट्रैफिकिंग से बचाया. इनमें से 25 बच्चों को बाल विवाह से बचाया गया, जबकि पांच बच्चों को ट्रैफिकिंग यानी बाल दुर्व्यापार से मुक्त कराया गया. ट्रैफिकिंग से मुक्त कराये गये बच्चों में दो लड़कियां थीं और तीन लड़के थे. लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान गुमला के सचिव चंद्रपति यादव ने कहा है कि लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान गुमला देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है. जेआरसी के 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए देश के 451 जिलों में काम कर रहे हैं. बचाव, सुरक्षा व अभियोजन की रणनीति पर अमल करते हुए इस नेटवर्क ने एक जनवरी 2025 से अब तक देश भर में 1,98,628 बाल विवाह रोके हैं. इसके अलावा इस दौरान देश भर से कुल 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लड़के व 14,316 लड़कियां थीं. इसके अलावा बच्चों की ट्रैफिकिंग के 42,217 मामले दर्ज कराये गये. श्री यादव ने कहा कि बाल सुरक्षा की दिशा में यह एक ऐतिहासिक साल रहा. जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और शिक्षकों के साथ मिल कर हमने जमीन पर जो किया है. उससे आये बदलाव और नतीजे देखे जा सकते हैं. बच्चे समाज के सबसे संवेदनशील अंग हैं और हमें यह याद रखना चाहिए कि ट्रैफिकिंग के पीड़ित बच्चों को मुक्त कराना सिर्फ पहला कदम है. अगर हमें गरीबी, बाल मजदूरी और बाल विवाह के दुष्चक्र को तोड़ना है, तो इसके लिए पुनर्वास, बच्चों का वापस स्कूलों में दाखिला और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ कर आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील परिवारों की सहायता आवश्यक है. अगर सभी धर्मों के पुरोहित वर्ग बाल विवाह संपन्न कराना बंद कर दे, तो यह कुप्रथा अपने आप बंद हो जायेगी. इसलिए सभी धर्मों के तीन लाख से अधिक धार्मिक नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है, जो लोगों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि बाल विवाह गैरकानूनी है और कोई भी धर्म इसकी मंजूरी नहीं देता. जिले में तमाम धार्मिक स्थलों ने बोर्ड लगाये हैं कि इस धार्मिक परिसर में बाल विवाह की स्वीकृति नहीं है. बाल विवाह मुक्त भारत के तहत केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान में जिला प्रशासन के साथ समन्वय के साथ लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान गुमला विवाह समारोहों में सेवाएं देने वालों और इसकी रोकथाम में अहम कड़ी जैसे टेंट वालों, बैंड वालों, दर्जियों, सजावट करने वालों व कैटरर्स के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार का सहयोग कानूनन अपराध है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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