बिशुनपुर. प्रखंड सभागार बिशुनपुर में शुक्रवार को झारखंड हाई इंपैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना के तहत जीवी दा हासा 2.0 अंतर्गत महिला मेटों के प्रथम बैच का दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण सत्र शुरू हुआ. प्रशिक्षण में बनारी, घाघरा, नरमा व निरासी पंचायत की 38 महिला मेट शामिल हुई हैं. प्रशिक्षण का उदघाटन बीडीओ सुलेमान मुंडरी ने किया. बीडीओ ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में मेट की भूमिका महत्वपूर्ण है. मेट गांव स्तर पर योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करती हैं. स्थानीय महिला मेट होने से कार्यों का पर्यवेक्षण सुलभ होता है तथा गुणवत्ता में भी सुधार आता है. उन्होंने कहा कि महिला मेटों की भागीदारी से महिला सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलता है. प्रशिक्षण से गुणवत्तायुक्त कार्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. प्रथम सत्र में मेटों को झारखंड हाई इंपैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना के उद्देश्यों की जानकारी दी गयी. इसके बाद मनरेगा अधिनियम 2005 पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रकाश डाला गया तथा कानून आधारित वीडियो फिल्म दिखायी गयी. द्वितीय सत्र में मेट चयन प्रक्रिया, पंजीकरण, जिम्मेदारियां, कार्यादेश, भुगतान प्रणाली, मूल्यांकन व निगरानी प्रक्रिया की जानकारी दी गयी. तृतीय सत्र में मनरेगा योजनाओं में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रपत्रों की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण के दौरान मौके पर समन्वयक दांगी हेंब्रम, प्रशिक्षक सहायक अभियंता मनरेगा सुजीत कुमार, टीम लीडर राम कुमार चौधरी, वाटरशेड एक्सपर्ट आदर्श आजाद, आजीविका विशेषज्ञ युगल किशोर यादव व जेंडर एवं प्रशिक्षण विशेषज्ञ कौशल किशोर समेत महिला मेट मौजूद थीं.
मनरेगा के सफल क्रियान्वयन में मेट की भूमिका महत्वपूर्ण : बीडीओ
बिशुनपुर में चार गांवों की 38 महिला मेटों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
