घाघरा में 14 वर्षीय किशोर ने प्लास्टिक की रस्सी से लगायी फांसी, चोरी के खुलासे के डर से उठाया खौफनाक कदम

गुमला के घाघरा में 14 वर्षीय किशोर ने चोरी पकड़े जाने के डर से फांसी लगाकर जान दे दी. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

गुमला: गुमला के घाघरा थाना क्षेत्र स्थित यज्ञ बगीचा मोहल्ले में 14 वर्षीय किशोर द्वारा प्लास्टिक की रस्सी के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मृतक की पहचान पुसो थाना के घाघरा गांव निवासी सुरेंद्र मिंज के पुत्र सुजल उरांव (14 वर्ष) के रूप में हुई है.

घटना की सूचना मिलते ही रविवार को पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिये सदर अस्पताल गुमला भेज दिया. फिलहाल पुलिस मामले की गहन छानबीन में जुट गयी है. मृतक के मौसा मंगलदेव उरांव ने अपने बयान में बताया कि सुजल होली के समय से ही अपनी बड़ी मम्मी मोनी देवी के घर यज्ञ बगीचा के पास रहकर नवाडीह स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ाई करता था.

दरअसल, सुजल की मां उसे बचपन में ही छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गयी थी. जिसके बाद से उसकी बड़ी मां मोनी देवी ने ही उसका पालन-पोषण किया था.

50 हजार रुपये की चोरी और नशे की लत

घटना की परतें खोलते हुए परिजनों ने बताया कि लगभग एक महीने पहले सुजल ने अपनी बड़ी मम्मी के घर से 50 हजार रुपये चुरा लिये थे. परिजनों को परसों ही इस चोरी की भनक लगी थी. गांव के अन्य लड़कों से पूछताछ में पता चला कि सुजल पिछले एक महीने से गांव में काफी पैसे उड़ा रहा था और वह गलत संगत में पड़कर नशा भी करने लगा था.

पूछताछ के डर से उठाया कदम

चोरी की बात उजागर होने के बाद से ही सुजल घबराया हुआ था और डर के मारे घर न जाकर जहां-तहां सोने लगा था. परिजन उसे सुधारने के लिये हॉस्टल में रखकर पढ़ाने का विचार कर रहे थे. लेकिन उससे पहले ही उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया.

सुजल अपनी बडी मां के घर से सामने स्थित विश्वनाथ उरांव के घर पहुंचा और वहां मवेशियों को बांधने वाली प्लास्टिक की रस्सी के सहारे फांसी के फंदे पर झूल गया. परिजनों को आशंका है कि चोरी पकड़े जाने और डांट-फटकार के डर से ही उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. पुलिस अब सभी पहलुओं से मामले की पड़ताल कर रही है.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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