जब हजारों श्रद्धालु पहुंचे शहीद स्थल, करौंदाबेड़ा में दिखा आस्था और श्रद्धा का महासंगम

पालकोट के करौंदाबेड़ा में तीन शहीद पुरोहितों की 32वीं पुण्यतिथि मनाई गई. बिशप आनंद और बिशप लीनुस ने शांति और प्रेम का संदेश दिया. हजारों श्रद्धालु शामिल हुए.

पालकोट. पालकोट के करौंदाबेड़ा पल्ली के तीन शहीदों फादर लौरेंस कुजूर, फादर जोसेफ डुंगडुंग एवं ब्रदर अमर अनुप इंदवार की 32वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को करौंदाबेड़ा स्थित निर्मला सेवा आश्रम में पुण्यतिथि समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में गुमला, खूंटी, रांची, सिमडेगा सहित ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, बंगाल आदि राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व झंडोत्तोलन के साथ किया गया. इसके पश्चात समारोही पावन मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. मुख्य अनुष्ठाता रांची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष आनंद डेबिड खलखो एवं सहायक अनुष्ठाता सिमडेगा धर्मप्रांत के बिशप भिंसेंट बारवा व गुमला धर्मप्रांत के बिशप डॉक्टर लीनुस पिंगल एक्का द्वारा मिस्सा बलिदान अर्पित कराया गया. मौके पर रांची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष आनंद डेबिड खलखो ने कहा कि गेहूं का दाना मिट्टी में गिर कर जब तक नहीं मर जाता है, तब तक वह अकेला रहता है. लेकिन यदि वह मर जाता है तो बहुत फल देता है. इसी प्रकार हमारे जीवन में डी और बी का बहुत बड़ा महत्व है. डी फोर डेट और बी फोर बर्थ यानि जीवन और मृत्यु प्रभु के इच्छा के अनुसार होता है. ईश्वर के इच्छा अनुसार हम इस दुनिया में आते हैं और उसके अनुरूप हम चुने जाते हैं. आज हम तीनों शहीद पुरोहितों के पुण्यतिथि समारोह में आयें हैं तो इसमें ईश्वर का अनुसार से आयें हैं. आप सभी लोग चुने हुए लोग हैं. उन्होंने कहा कि ईश्वर सभी मानव जाति को अपने अनुरूप बनाकर इस संसार में भेजा है. प्रभु का संदेश को जन-जन तक फैलाये और उनके बताये मार्ग पर चलें और भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में शांति का संदेश दें.

हम प्रेम, दया और शांति के मार्ग पर चलें : बिशप लीनुस

गुमला धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप लीनुस पिंगल एक्का ने कहा है कि ईश्वर से प्यार करने वाले लोग इस दुनिया में आये और लोगों के बीच प्रेम, दया और शांति का संदेश दिया. तीनों शहीद पुरोहित सत्य की रक्षा करने के लिए इस दुनिया में आये थे. मैं आपलोगों से कहना चाहूंगा कि आप लोग ईश्वर के प्रति विश्वास करें. लोगों के बीच प्रेम, दया व शांति का संदेश को पूरे दुनिया में फैलाये. ईश्वर की आज्ञा का पालन करें. इस समाज में शैतान अभी भी है. वे शैतान रूपी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं. समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं. आप लोग सावधान हो जाइये और संभल जाइये. अपने मन व विवेक से काम करें. कलीसिया समाज को एकजुट व एकता के सूत्र में बांधने का हर संभव प्रयास करें.

भक्ति प्रार्थना के बीच तीर्थयात्री पहुंचे शहीद स्थल

समारोह में माईनर सेमिनरी की अगुवाई में रोजरीमाला एवं भक्ति प्रार्थना के बीच तीर्थयात्री शहीद स्थल पर पहुंचे. जहां तीर्थयात्रियों ने तीनों शहीदों की समाधि पर फूलमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. श्रद्धालुओं के लिए शहीद आवास सुबह ही खोल दिया गया था. तीर्थयात्रा के दौरान श्रद्धालु बैनर, झंडा व बैज के साथ दिखे, जबकि छात्र-छात्राएं अपने स्कूल यूनिफॉर्म, स्कूल का झंडा, क्रूसवीर झंडा एवं मरियामार्ग झंडा के साथ शामिल हुए थे. मिस्सा बलिदान के दौरान प्रवेश नाच, प्रवेश गान, दया याचना, महिमा गान, बाईबल जुलूस, अंतर भजन, जयघोष, विश्वास गीत, निवेदन, चढ़ावा नाच आदि प्रस्तुत किया गया.

समारोह में शामिल पुरोहित

समारोह में फादर डीन बिलयम मिंज, फादर मोजेश खलखो, फादर जेफरीनुस तिर्की, फादर सुशील कुजूर, फादर एडमोन बाड़ा, फादर प्रभुदास तिर्की, फादर निखिल मिंज, फादर ख्रीस्टोफर तिर्की, फादर जॉर्ज लकड़ा, फादर राजू टोप्पो, फादर अगस्तुस कुजूर, फादर अमित तिर्की, फादर बरनाबस केरकेट्टा, फादर दीपक सोरेंग, फादर प्रताप बिलुंग, फादर अशोक रौशन मिंज, फादर खुशमंत एक्का, फादर एलयिस मिंज, फादर निकोलस सोरेंग, फादर रौशन केरकेट्टा, फादर वाल्टर कुजूर, फादर बिनोद हेमरोम, फादर ऐरिक इंदवार, फादर नवीन कुल्लू, फादर रंजीत खलखो, फादर डेविड एक्का, फादर बंसत मिंज, फादर मिलयानुस सोरेंग, फादर नुवास किंडो, फादर इरेंसियुस मिंज, फादर विमल जोजो, फादर ग्रेगोरी टोप्पो, फादर अविनाश लकड़ा, फादर अर्जुन मिंज, फादर पीटर मिंज, फादर जीतन कुजूर, फादर एडवर्ड टोप्पो, फादर पवन लकड़ा, फादर डेविड कुजूर, फादर संदीप किंडो, फादर कुलवंत मिंज, फादर फ्लोरेंस डुंगडुंग, फादर बिपिन बारला, फादर प्रकाश मिंज, फादर सीप्रियन कुल्लू, फादर इग्नासियुस मिंज, फादर रिमिश कुजूर सहित विभिन्न धर्मसमाज की पुरोहित, धर्मबहनें व हजारों की संख्या में विश्वासी मौजूद थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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