बिशुनपुर के इस मंदिर में हर छह माह में बदलता है शिवलिंग का रंग, जानें क्या कहते हैं स्थानीय लोग

गुमला के सेरका गांव स्थित प्राचीन शिवालय में शिवलिंग का रंग हर छह माह में बदलता है। सावन में यहां दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

बिशुनपुर: बिशुनपुर प्रखंड मुख्यालय से सटे सेरका गांव स्थित प्राचीन शिवालय अपनी अनूठी मान्यता के कारण पूरे क्षेत्र में आस्था का केंद्र है. यहां स्थापित नागेश्वर नाथ व दूधेश्वर नाथ शिवलिंग का रंग हर छह माह में स्वतः बदलने की मान्यता है. स्थानीय लोगों के अनुसार शिवलिंग कभी लाल, तो कभी सफेद दिखाई देता है.

सावन माह में इसका रंग सफेद हो जाता है. इस अद्भुत मान्यता के कारण गुमला समेत आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं. ग्रामीणों के अनुसार मंदिर अत्यंत प्राचीन है.

मान्यता है कि अंग्रेजों के भारत आगमन से पहले एक साहू परिवार ने तत्कालीन राजा भैया साहब से भूमि प्राप्त कर इस मंदिर का निर्माण कराया था. तभी से यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती आ रही है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है.

मंदिर के पुजारी टेमन दास ने बताया कि सावन में प्रतिदिन सुबह से ही भक्तों की कतार लग जाती है. भक्त जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से सेरका शिवालय पहुंच कर जलाभिषेक करने की अपील की.

टेमन दास, पुजारीगांव के बुजुर्ग चंदू गिरी ने बताया कि बचपन से ही शिवलिंग का रंग बदलते देखते आ रहे हैं. पूर्वज भी इस परंपरा करते थे. कहा कि सेरका शिवालय गांव की पहचान है और यहां आनेवाले भक्तों की आस्था कभी निराश नहीं होती. सावन में भगवान जलाभिषेक करने का धार्मिक महत्व है.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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