गुमला. गुमला शहर से सटे खोरा गांव में प्राचीन दसई जतरा का आयोजन किया गया. इसमें एक दर्जन गांवों के हजारों लोग शामिल हुए. खोड़हा दल पारंपरिक वेशभूषा में थे. जतरा में सभी खोड़हा दलों ने नृत्य व गीत प्रस्तुत किया. पूरा जतरा मैदान ढोल, मांदर व नगाड़ा से गूंजता रहा. चारों तरफ महिलाएं लाल पाड़ी साड़ी व पुरुष धोती कुर्ता में नजर आ रहे थे. जतरा के दौरान बारिश हुई, परंतु बारिश के बाद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और सभी लोग नाचते गाते नजर आये. मुख्य अतिथि पूर्व सांसद सुदर्शन भगत, जिला परिषद गुमला की उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी, मुखिया लालो देवी थे. मौके पर सुदर्शन भगत ने कहा है कि जतरा हम सभी को एकजुट होकर रहने का संदेश देता है. इसलिए इस प्रकार के आयोजन में हम सभी लोगों की सहभागिता जरूरी है. कहा कि आदिवासी संस्कृति धरोहर को बचाये रखने और समाज को एकजुट रखने के लिए इस प्रकार का आयोजन होते रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम सभी प्राचीन परंपरा, संस्कृति व धरोहर को बचा कर रखें. संयुक्ता देवी ने कहा कि खोरा गांव में प्राचीन काल से दसई जतरा का आयोजन किया जा रहा है. आज भी यह परंपरा जीवित है. युवा पीढ़ी इस परंपरा से सीख लें और आने वाले वर्षों में भी इस प्रकार का आयोजन होता रहे. उन्होंने युवाओं से बुरी आदतों से दूर रहने की अपील की. मौके पर श्री दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष रामस्वरूप सिंह, सचिव देव कुमार सिंह, भोला चौधरी, जितिया उरांव, पतराज टोप्पो, गणपति साहू, दिनेश साहू आदि मौजूद थे.
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