सरहुल प्रकृति व मानव के संतुलन का प्रतीक : डीआइजी

100 खोड़हा दलों के साथ निकाली गयी शोभायात्रा, मांदर की थाप पर थिरके लोग

बिशुनपुर. प्रखंड में प्रकृति का पर्व सरहुल पारंपरिक तरीके से मनाया गया. करमटोली स्थित सरना स्थल पर बैगा दसमा उरांव और पुजार गुड्डू उरांव द्वारा विधि-विधान से मां सरना की पूजा-अर्चना के बाद सरना फूल का वितरण किया गया. मौके पर प्रखंड स्तरीय सरहुल पूजा समिति के नेतृत्व में निकाली गयी करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी शोभायात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 100 खोड़हा दल शामिल हुए. पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीण मांदर और नगाड़ों की गूंज पर थिरकते हुए बिरसा बाग पहुंचे. रास्ते में जगह-जगह संस्थाओं द्वारा स्टॉल लगा कर श्रद्धालुओं के बीच शरबत और चना-गुड़ का वितरण किया गया. बिरसा बाग में आयोजित मंचीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीआरपीएफ डीआइजी रवींद्र भगत, पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव, एसडीपीओ अनुज उरांव और बीडीओ सुलेमान मुंडरी समेत गणमान्य लोग उपस्थित थे. अतिथियों ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले खोड़हा दलों को पुरस्कृत किया. डीआइजी रवींद्र भगत ने कहा कि सरहुल प्रकृति व मानव के संतुलन का प्रतीक है. समीर उरांव ने सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया. एसडीपीओ अनुज उरांव ने युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने की अपील की. कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष कमलेश उरांव, सचिव कार्तिक उरांव सहित हजारों ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

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