रायडीह. रायडीह प्रखंड के कुड़ोछतरपुर गांव में मंगलवार को प्रकृति पर्व सरहुल उत्साह, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. इस अवसर पर पूरा गांव भक्ति व सांस्कृतिक उल्लास के रंग में रंगा नजर आया. कार्यक्रम का शुभारंभ मांझाटोली स्थित सरना स्थल पर पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ, जहां बैगा पूजार मोती लाल मुंडा, मंगरू मुंडा और बुधवा महतो ने पूजा संपन्न करायी. इस दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से समाज की सुख-शांति, समृद्धि, अच्छी वर्षा और बेहतर फसल उत्पादन की मंगल कामना की. पूजा के बाद डाड़ा पड़हा रायडीह व अतखा पड़हा कुड़ोछतपुर के संयुक्त नेतृत्व में सरहुल शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा धूमकुड़िया भवन अखरा से शुरू होकर नेशनल हाइवे 43 होते हुए शंखमोड़ मांझाटोली स्थित पंखराज साहेब कार्तिक उरांव चौक तक पहुंची. पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय समुदाय के लोग मांदर और नगाड़े की थाप पर थिरकते हुए अपनी समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन कर रहे थे. सामूहिक नृत्य व पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा. शंखमोड़ मांझाटोली पहुंचकर अतिथियों ने महापुरुष कार्तिक उरांव की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. मौके पर मिशिर कुजूर, मुखिया चुयां कुजूर, उपप्रमुख दीपक कुजूर, मार्था एक्का, डाड़ा पड़हा बेल शशिकांत, दिवान, सोमेश्वर भगत, मूली पड़हा बेल देवराम भगत, माधुरी भगत, सीता देवी, गौरी किंडो, पुष्पा देवी, शांति उरांव, फुलमनी उरांव, सोनो मिंज, संत कुमार भगत, कमलेश झा, बिनोद गुप्ता, अशरफ राय लालो, शैलेश कुमार झा, अभिषेक गुप्ता, किरण प्रसाद, जमाल ताज आदि मौजूद थे.
सरहुल पर निकली शोभायात्रा, पारंपरिक गीतों से गूंजा क्षेत्र
सरहुल पर निकली शोभायात्रा, पारंपरिक गीतों से गूंजा क्षेत्र
