प्रशासन की बेरुखी से परेशान ग्रामीणों ने उठाया फावड़ा, पालकोट में एक किमी सड़क की श्रमदान से मरम्मत

पालकोट के कटिबा करमटोली गांव में प्रशासन की बेरुखी से परेशान ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क की मरम्मत की. स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को हो रही थी भारी परेशानी.

गुमला : पालकोट में प्रशासन की बेरुखी का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीणों ने बुधवार को श्रमदान कर करीब एक किलोमीटर तक सड़क की मरम्मत की. मामला पालकोट प्रखंड की नाथपुर पंचायत अंतर्गत कटिबा करमटोली गांव का है. गांव में करीब 60 घर हैं और मुख्य सड़क कच्ची है. ग्रामीणों का आरोप है कि शासन को गांव की समस्या से कोई मतलब नहीं है. प्रखंड प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है.

बारिश में सड़क पर कीचड़ और फिसलन से बढ़ जाती है परेशानी

श्रमदान करने वाले गांव के आशीष तिर्की, दिलीप तिर्की, जतरू पहान, राहुल तिर्की, भोला खड़िया, लालू खड़िया, बृजपाल तिर्की, बिनोद तिर्की, शनि लोहरा, अजय खड़िया, रौशन खड़िया, चरकू खड़िया और श्रवण लोहरा समेत अन्य लोगों ने बताया कि बरसात में सड़क की हालत काफी बदतर हो जाती है. सड़क पर जलजमाव, फिसलन और कीचड़ होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है.

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करीब 200 की आबादी, रोजमर्रा के काम के लिए गांव से निकलते हैं लोग

ग्रामीणों ने बताया कि गांव की आबादी करीब 200 है. गांव के लोग रोजमर्रा के कामों के लिए प्रतिदिन गांव से बाहर निकलते हैं, लेकिन सड़क की खराब हालत के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है.

स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है. बच्चों को रोज स्कूल आने-जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है. बारिश के दौरान कीचड़ और फिसलन के कारण उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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