रंगे हाथ धर ली गईं मैडम: रांची ACB ने घूसखोर पंचायत सचिव को गुमला में दबोचा, 2026 की छठी बड़ी कार्रवाई

Ranchi ACB Action: गुमला के विशुनपुर में एसीबी रांची की टीम ने पंचायत सचिव किरण कुसुम खलखो को 8 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. कुएं की मरम्मत के भुगतान के बदले उन्होंने एक गांव के ही एक शख्स से घूस मांगी थी. जानें क्या है सजा का प्रावधान?

Ranchi ACB Action, गुमला, (दुर्जय पासवान): गुमला जिले के विशुनपुर प्रखंड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रांची की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की है. घूसखोरी के एक मामले में पंचायत सचिव किरण कुसुम खलखो को 8 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है. एसीबी की टीम ने ये गिरफ्तारी विशुनपुर प्रखंड कार्यालय परिसर से की है.

कुएं की मरम्मत के भुगतान के लिए मांगी गयी थी घूस

मिली जानकारी के अनुसार, विशुनपुर थाना क्षेत्र स्थित चट्टी सेरका पंचायत के निवासी परमेश्वर सिंह ने एसीबी रांची को लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज करायी थी. जिसमें उन्होंने बताया कि ग्राम सभा की बैठक में उनकी जमीन पर मौजूद कुएं के रेनोवेशन के लिए उनका नाम फाइलन हुआ था. इसी के तहत उन्होंने मरम्मत का काम पूरा कर लिया. काम खत्म होने के बाद जब वे भुगतान के लिए पंचायत सचिव के पास पहुंचे तो उनसे कहा गया कि शेष राशि निकालने और बिल को स्वीकृति दिलाने के बदले 8 हजार रुपये देने होंगे.

रिश्वत से इनकार, एसीबी से की शिकायत

परमेश्वर सिंह ने घूस देने से साफ मना कर दिया. इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी एसीबी रांची को दी. शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने प्राथमिक जांच करायी, जिसमें आरोप सही पाये गये.

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कैसी बिछायी गयी गिरफ्तारी की जाल

मामले की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई. तय रणनीति के तहत गुरुवार को परमेश्वर सिंह को रुपये लेकर पंचायत सचिव के पास भेजा गया. जैसे ही सचिव ने उनसे 8 हजार रुपये लिये, पहले से घात लगाकर तैयार खड़े एसीबी की टीम ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया. अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2026 में रांची एसीबी की यह छठी ट्रैप कार्रवाई है. फिलहाल गिरफ्तार पंचायत सचिव से पूछताछ की जा रही है. साथ ही आरोप सही पाये जाने पर गुरुवार को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7(ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

घूसखोरी मामले में कितने साल सजा का प्रावधान है?

यूं तो भारत में घूसखोरी से जुड़े मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट- 1988 के तहत होती है. इस कानून के अनुसार यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप अदालत में साबित हो जाता है, तो आम तौर पर कम से कम 3 साल से लेकर अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा अदालत जुर्माना भी लगा सकती है. हालांकि, सजा की अवधि इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोर्ट में दिये गये सबूत कितने मजबूत हैं और मामले की परिस्थितियां क्या हैं.

आरोपी के पास बचाव के क्या विकल्प हैं?


अब सवाल उठता है कि गिरफ्तार पंचायत सचिव के पास बचाव के लिए क्या क्या विकल्प है. नियमानुसार देखें तो उनके पास कानूनी रूप से बचाव के कई ऑप्शन होता है. आइये जानते हैं वह क्या क्या चीजें हैं जो आरोपी अपने बचाव में इस्तेमाल कर सकता है.

जमानत के लिए आवेदन : गिरफ्तारी के बाद वे अदालत में नियमित या अंतरिम जमानत की मांग कर सकती हैं.

सबूतों को चुनौती देना : इस तरह के ट्रैपिंग केस में बरामद पैसे, केमिकल टेस्ट, गवाह और पूरी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

प्रक्रियात्मक त्रुटि का मुद्दा : यदि एसीबी की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन सही तरीके से नहीं हुआ हो तो वह इसे भी बचाव के तौर पर उठा सकती है.

ट्रायल के दौरान निर्दोष साबित होने की कोशिश : आरोपी अदालत में अपने गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर अपने पक्ष में तर्क रख सकता है.

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Published by: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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