गुमला. गुमला सदर अस्पताल में इलाज के लिए एंड्रॉयड मोबाइल अनिवार्य करने की व्यवस्था ने गरीब व ग्रामीण मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अस्पताल परिसर में सोमवार को अव्यवस्था, लाचारी व मरीजों की पीड़ा खुल कर सामने आयी. सिविल सर्जन डॉ शंभूनाथ चौधरी की ओर से बिना एंड्रॉयड फोन के पर्ची नहीं काटे जाने की बात ने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भयभीत कर दिया है. सोमवार की सुबह कुलाबीरा गांव निवासी सरस्वती देवी अस्पताल परिसर में फूट-फूट कर रोती नजर आयीं. उनका आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन ने साफ कह दिया कि बिना एंड्रॉयड मोबाइल के पर्ची नहीं कटेगी. वहीं चेटर के अमृतनगर निवासी सीता देवी भी इसी समस्या से जूझती दिखीं. इलाज के लिए घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें अपने इंटर में पढ़ने वाले बेटे कुश कुमार को स्कूल से बुलाना पड़ा, ताकि मोबाइल की व्यवस्था हो सके. इस व्यवस्था के खिलाफ अब जनाक्रोश तेज होने लगा है.
मरीजों ने बयां किया दर्द
सीता देवी ने कहा कि अस्पताल आने के बाद ही यहां की बदहाल व्यवस्था का पता चला. दो घंटे बीतने के बाद भी इलाज नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि सीएस के तुगलकी फरमान ने हमें अपनी गरीबी पर आंसू बहाने को मजबूर कर दिया है. सरस्वती देवी ने कहा कि सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बावजूद 11 बजे तक पर्ची नहीं कट सकी. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रोजाना कई महिलाएं इस तरह परेशान हो रही हैं.
एंड्रॉयड फोन की अनिवार्यता गरीबों के साथ अन्याय : देवकी
महिला एसोसिएशन की अध्यक्ष देवकी देवी ने अस्पताल प्रबंधन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों से आने वाले अधिकांश लोगों के पास साधारण मोबाइल तक नहीं होता, ऐसे में एंड्रॉयड फोन की अनिवार्यता गरीबों के साथ अन्याय है. उन्होंने कहा कि तकनीक के नाम पर मरीजों को परेशान करना बंद होना चाहिए. अस्पताल की व्यवस्था पहले से ही चरमरा चुकी है. यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो 25 मई से सदर अस्पताल गुमला के मुख्य गेट के समीप आमरण अनशन किया जायेगा.
