सड़क नहीं तो एंबुलेंस कैसे आए; गुमला में गर्भवती को गेंड़ुआ भार पर ढोकर 2 KM ले गए परिजन, 80 साल बाद भी भगवान भरोसे गांव

गुमला के बेंदवाकोना गांव की तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल उठा रही है। सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को करीब 2 किलोमीटर तक डोली में ढोकर मेन रोड तक ले जाना पड़ा, जहां से निजी वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना गांव की मूलभूत सुविधाओं की कमी को उजागर करती है।

जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट

गुमला. यह तस्वीर अबुआ सरकार के अबुआ राज और जिला प्रशासन के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच के दावे पर सवाल खड़े कर रही है. तस्वीर रायडीह प्रखंड के कोब्जा पंचायत के बेंदवाकोना गांव की है, जहां सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को गेंड़ुआ भार में ढोकर करीब दो किमी पैदल मेन रोड तक ले जाना पड़ा.

एंबुलेंस नहीं पहुंची, निजी वाहन से अस्पताल ले गये

गेंड़ुआ भार में ले जायी जा रही महिला गणेश सिंह की पत्नी बृंदावती देवी (24) हैं. सड़क नहीं होने के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है. ऐसे में परिवार के लोग बृंदावती देवी को गेंड़ुआ भार में ढोकर करीब दो किमी पैदल मेन रोड तक पहुंचे. इसके बाद निजी वाहन किराये पर लेकर उन्हें सदर अस्पताल गुमला ले जाया गया.

सड़क, पानी और बिजली से वंचित गांव

ग्रामीणों के अनुसार, आजादी के 80 साल बाद भी बेंदवाकोना गांव में सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं. गांव के ब्रजनाथ सिंह ने बताया कि सड़क नहीं होने से विकास पूरी तरह ठप है. बीमार पड़ने पर कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता है.

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डाड़ी-चुआं के पानी पर निर्भर

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को पीने के लिए डाड़ी-चुआं के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. गर्मी के दिनों में डाड़ी-चुआं सूख जाता है, जबकि बरसात में पानी गंदा हो जाता है. बिजली नहीं होने के कारण लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं. बच्चे ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करते हैं.

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कई बार गुहार, फिर भी नहीं हुई सुनवाई

ब्रजनाथ सिंह ने बताया कि सड़क, पानी और बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार विधायक, सांसद और प्रशासन से गुहार लगायी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है. वहीं, युवा समाजसेवी कमल किशोर पहान ने कहा कि यह क्षेत्र के गांवों का दुर्भाग्य है कि वे अब तक विकास से कोसों दूर हैं. प्रशासन और जनप्रतिनिधि समस्या सुनकर भी अनसुना कर देते हैं.

उन्होंने प्रशासन से बेंदवाकोना तक करीब दो किमी मुख्य सड़क का जल्द निर्माण कराने, पेयजल के लिए जलमीनार लगाने और गांव में बिजली की सुविधा बहाल करने की मांग की है.

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By शेखर सुमन

शेखर सुमन एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वे झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़ी खबरों के साथ-साथ राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को कवर करते हैं.

प्रभात खबर से पहले शेखर सुमन ने करीब डेढ़ वर्ष तक झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘सार भारत’ में रिपोर्टर के रूप में कार्य किया. इस दौरान उन्होंने राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक विषयों के साथ-साथ अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों की रिपोर्टिंग की.

शैक्षणिक रूप से शेखर सुमन ने संत जेवियर्स कॉलेज, रांची से अकाउंट्स में स्नातक की डिग्री हासिल की. इसके बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से वर्ष कॉमर्स में मास्टर्स और रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की.

पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि राजनीति, सामाजिक मुद्दों और अपराध से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में है.

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