बकरी चोरों से परेशान लोगों पुलिस की कार्रवाई पर उठाये सवाल

20 गांवों की बैठक. चोरों को पकड़ने के लिए ग्रामीण अब अपने गांवों में देंगे रात्रि पहरा

गुमला. चैनपुर प्रखंड की बरडीह पंचायत व आसपास के करीब 20 गांवों में बकरी चोरों का आतंक है. बीते दो माह में 50 से अधिक बकरा व बकरी की चोरी हो चुकी है. इससे त्रस्त ग्रामीणों ने सोमवार को बरडीह पंचायत मुख्यालय में बैठक की. बैठक में 20 गांवों के दो हजार से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. बैठक में बकरी चोरों को पकड़ने, सेंदरा करने व गांव में रात्रि पहरा देने का निर्णय लिया गया. साथ ही पुलिस की कार्रवाई पर लोगों ने सवाल खड़ा किये हैं. ग्रामीणों ने कहा है कि बकरी चोरों को पकड़ कर कई बार पुलिस को सौंपा गया. लेकिन पुलिस थाना से सभी बकरी चोरों को छोड़ देती है. इसलिए अब ग्रामीण खुद फैसला करेंगे. हर एक गांव में रात्रि पहरा देने के लिए युवाओं की टीम बनायी गयी है. अब युवा अपने गांव में रात्रि पहरा देते हुए रात को गांव में घुसने वाले अनजान लोगों को पकड़ेंगे. पकड़े गये अनजान व्यक्ति की बातों को सुनने के बाद सुनवाई की जायेगी. इधर, बरडीह पंचायत के मुखिया ईश्वर खेस ने कहा है कि ग्राम पंचायत बरडीह में आज एक पंचायत स्तरीय बैठक की गयी. बैठक में विशेष रूप से पंचायत में आये दिन खस्सी व बकरी चोरी की घटना चरम पर हो रही है, जिस पर चर्चा की गयी. आये दिन मवेशी चोरी की घटना की जानकारी प्रशासन को आवेदन और व्यक्तिगत रूप से दिया गया है. लेकिन चोरी की घटना में अंकुश नहीं लग रहा है और न ही प्रशासन चोरी को रोकने में मदद कर रही है. आक्रोशित ग्रामीण पुनः प्रशासन से उम्मीद करती की इस तरह घटना और न हो. साथ ही रतजगा करने व बैरियर लगाने का निर्णय लिया गया. अगर प्रशासन इस बार कार्रवाई नहीं करती है, तो मजबूरी हम ग्रामीण अपना फैसला सुनायेंगे.

नक्सल पर अंकुश लगा, तो बढ़ी चोरी

बरडीह पंचायत में रोघाडीह, घुसरी, बरडीह, तबेला, कुकरूंजा, कोल्दा, सोकराहातु, कोचागानी, केरागानी व कुइयो गांव के लोग बकरी व खस्सी चोरी से परेशान हैं. आज से पांच साल पहले तक ये गांव नक्सल प्रभावित था. कई बड़े नक्सली इस क्षेत्र में रहते थे. परंतु कुरूमगढ़ थाना व पुलिस पिकेट की स्थापना के बाद नक्सल पर अंकुश लगा है. पर दुर्भाग्य है कि नक्सली कम हुए, तो क्षेत्र में चोरी बढ़ गयी, जिससे किसान व ग्रामीण परेशान हैं. ग्रामीणों ने कहा है कि ये सभी गांव पूरी तरह नक्सल पीड़ित है. परंतु नक्सली घटनाएं कम हुई, तो चोरी की घटनाएं बढ़ गयी हैं. इन गांवों की आबादी करीब सात हजार है.

पुलिस ने थाना से चोरों को छोड़ दिया

बरडीह गांव की हीरामुनी बाई ने कहा कि दो माह के अंदर 50 से अधिक बकरा व बकरी की चोरी हो चुकी है. फरवरी माह में अनजान लोगों को गांव में घुसने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाने का निर्णय लिया गया था. लेकिन पुलिस ने यह कह कर बैरिकेडिंग लगाने नहीं दिया कि पुलिस अब चोरों को पकड़ेगी. परंतु पुलिस अपने वादे में फेल हो गयी है. बीते 24 मार्च को दो चोरों को बकरी के साथ पकड़ा गया था. उन दोनों चोरों को पुलिस को सौंपा गया था. परंतु दूसरे दिन ही पुलिस ने बकरी चोरों को चुपके से थाना से छोड़ दिया. जब थानेदार से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे दोनों चोर नहीं थे. इसलिए जांच के बाद छोड़ दिया गया था. हीरामुनी ने कहा है कि अब पुलिस की भूमिका पर संदेह हो रहा है. इसलिए हम खुद आंदोलन करेंगे.

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