गुमला. सदर प्रखंड अंतर्गत कुलाबिरा पंचायत के पतिया गांव में बुधवार को कार्यशाला सह बीआरसी का उदघाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया. डीडीसी दिलेश्वर महतो, डीएचओ तमन्ना परवीन व बीडीओ अशोक कुमार चोपड़ा ने संयुक्त रूप से बीआरसी का उदघाटन किया. वहीं राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत आयोजित कार्यशाला में 750 किसानों को जैविक खेती लिए प्रत्येक किसान को 400 रुपये ड्रम के लिए एवं 300 रुपये प्रति महीना प्रोत्साहन राशि का विधिवत भुगतान की शुरुआत की गयी. डीडीसी ने प्रकृति खेती के किसान का खेत भ्रमण किया व किसानों को प्राकृतिक खेती करने व उसके बाजार व्यवस्था पर जोर दिया. डीडीसी ने किसानों की मांग पर सिंचाई के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने का आश्वासन दिया. कहा कि प्रधानमंत्री जी का यह सोच है कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसका सशक्तीकरण जैविक खेती से ही संभव है. उनका मानना है की रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए अब देशभर में पारंपरिक खेती पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है. डीएचओ तमन्ना परवीन ने बताया कि गुमला के किसानों के लिए जैविक खेती कोई नयी चीज नहीं है. यह उनकी पुरानी कृषि परंपरा का हिस्सा रही है. पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने अधिक उत्पादन की चाह में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ा दिया. इससे खेतों की मिट्टी की उर्वरता में गिरावट आयी और मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है. लेकिन अब पुनः जैविक खेती की ओर लौटने का समय आ गया है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को बढ़ावा देने के लिए जिले के आठ पंचायतों का चयन किया गया है. कामडारा प्रखंड के रेड़वा व सरिता, गुमला प्रखंड के कुलाबिरा, कलिगा व मुरकुंडा, रायडीह प्रखंड का ऊपरखटंगा व घाघरा प्रखंड के बेलागड़ा व चुंदरी पंचायत का चयन जैविक खेती के लिए किया गया है. कहा कि यह पहल गुमला जिले के लिए कृषि के क्षेत्र में एक नयी क्रांति का संकेत है. मौके पर सीआरपी सुषमा देवी, बीआरसी उद्यमी अलका देवी आदि मौजूद थे.
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