Jharkhand News: न सड़क है और न नदी पर पुल, सरकारी सुविधा भी नहीं, ऐसी है गुमला के इस गांव की कहानी

Jharkhand News: रायडीह प्रखंड के घोर उग्रवाद प्रभावित के पंडरीपानी, डोंगयारी व लोहराडेरा गांव में निवास करने वाली हजारों की आबादी सड़क व पुल के अभाव में अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रही है

रायडीह प्रखंड के घोर उग्रवाद प्रभावित के पंडरीपानी, डोंगयारी व लोहराडेरा गांव में निवास करने वाली हजारों की आबादी सड़क व पुल के अभाव में अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रही है. उपरोक्त गांवों के लोग जिस मार्ग को आवागमन के रूप में उपयोग करते हैं. उसकी स्थिति ठीक नहीं है. वहीं नदी में पुल नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में भी भारी परेशानी हो रही है.

बरसात के दिनों में उपरोक्त गांवों के लोग टापू में कैद होकर रह जाते हैं. गांवों के ग्रामीणों ने अपनी इस समस्या का समाधान करने की मांग उपविकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी से की है. इस मांग को लेकर ग्रामीण बुधवार को उपविकास आयुक्त से मुलाकात करने के लिए गुमला पहुंचे थे. जहां ग्रामीणों ने उपविकास आयुक्त को आवेदन सौंपा और सड़क व पुल बनाने की मांग की. आवेदन के माध्यम से ग्रामीणों ने कोंडरा-रामरेखा मुख्य पथ पर स्थित कुकुरडुबा से पंडरीपानी, डोंगयारी व लोहराडेरा तक सड़क एवं गांव से होकर बहनी वाली नदी पर पुल बनाने की मांग की है.

ग्रामीणों ने बताया कि रायडीह प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोंडरा के पंडरीपानी, डोंगयारी, लोहराडेरा में झारखंड राज्य बने 21 साल गुजर जाने के बाद भी अब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंची है. इसके कारण आये दिन ग्रामवासियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामवासी जिस मार्ग को आवागमन के रूप में उपयोग करते हैं. उस मार्ग की स्थिति काफी खराब है.

लगभग छह किमी तक लंबी सड़क में जहां-तहां चट्टान निकला हुआ है. काफी जगहों पर छोटे-बड़े गड्ढे हैं. जिस पर किसी भी प्रकार का वाहन चलाना संभव नहीं है. गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाये तो उसे खटिया में ढोकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है. स्कूली बच्चों को रोजाना 10 किमी पैदल चलना पड़ता है. गांव में एक नदी है. यदि प्रखंड मुख्यालय जाने की जरूरत पड़ती है तो गांव से होकर बहने वाली नदी को पार करना पड़ता है. नदी पर पुल भी नहीं है.

पुल के अभाव में नदी के पानी में उतर कर पार करना पड़ता है. फिलहाल नदी पार करने के लिए बांस के छलटा से पुल बनाये हैं. वह भी बार-बार टूट जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में होती है. नदी में पानी भर जाने के कारण गांव के लोग गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं. आवेदन में रमेश सिंह, बसंत कुमार सिंह, राधा कुमारी, इंद्रजीत सिंह, हीरानाथ सिंह, गणेश सिंह, मनकुंवारी देवी, बुधन देवी, छटकुमार सिंह, सविता देवी, बजरंग सिंह, मगधा सिंह, जितेंद्र सिंह, गोपाल सिंह, अमित सिंह, कौशल्या देवी, बंधु सिंह, मोहर सिंह, अमृता देवी, रामप्रकाश सिंह, सविता देवी, रामप्रताप सिंह, मीना देवी, शिवकुमार सिंह, सीताराम सिंह सहित अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर है.

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By Prabhat khabar news desk

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