ग्राउंड रिपोर्ट : अधिकांश घरों में लटका है ताला, कई कर गये पलायन
कामडारा प्रखंड में रेड़वा चुआंटोली गांव है.
: उग्रवाद के डर से कई परिवार दूसरे राज्य पलायन कर गये हैं 6 गुम 18 में मार्टिन केरकेटटा का घर, जिसमें लगा है ताला 6 गुम 19 में रेड़वा चुआंटोली में सन्नाटा पसरा हुआ है सतीश बड़ाइक, कामडारा कामडारा प्रखंड में रेड़वा चुआंटोली गांव है. साधारण दिखने वाला यह गांव घोर नक्सल माना जाता है. क्योंकि, लंबे समय से इस क्षेत्र में उग्रवादियों का साम्राज्य रहा है. इसी गांव में मार्टिन केरकेट्टा का जन्म हुआ था. 25 साल पहले वह दिनेश गोप से मिलकर हथियार उठाया और पीएलएफआइ संगठन बनाया. इसके बाद मार्टिन ने कई घटनाओं को अंजाम दिया. मार्टिन के मारे जाने के बाद रेड़वा चुआंटोली गांव के अधिकांश घरों में ताला लटका हुआ मिला. कुछ लोगों से बात की गयी. डर से ग्रामीण बात करने से कतराते रहे. हालांकि, दबी जुबान से कुछ लोगों ने बताया कि गांव के अधिकांश लोग उग्रवादियों के डर से पलायन कर गये हैं. इधर, मुठभेड़ में मार्टिन के मारे जाने की सूचना के बाद गांव में जो लोग रह रहे थे. वे भी बुधवार की सुबह को इधर-उधर कहीं चले गये. इसलिए अधिकांश घरों में ताला लटका हुआ मिला. उग्रवाद के डर व क्षेत्र में रोजगार के साधन नहीं होने के कारण कई परिवार गांव से दूसरे प्रदेश मजदूरी करने चले गये. अभी खेतीबारी का समय है. इसके बाद भी प्रदेश में गये लोग वापस नहीं लौटे हैं. कई परिवार तो वर्षों से प्रदेश में जमे हुए हैं. डर से गांव भी नहीं आते हैं. चुआंटोली गांव का विकास भी ठीक ढंग से नहीं हुआ है. कुछ लोगों से गांव में मुलाकात हुई तो वे अपना नाम नहीं बताये. उन लोगों ने कहा कि हमें यहीं रहना है. इसलिए हम ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं. अखबार में नाम भी नहीं छापने की बात कही. मार्टिन के घर में ताला लगा हुआ था रेड़वा चुआंटोली स्थित मार्टिन केरकेट्टा के घर पर ताला लटका हुआ है. कुछ लोगों ने बताया कि कई दिनों से घर पर ताला लगा हुआ है. परिवार के लोग यहां नहीं रहते हैं. मार्टिन की पत्नी भी कहां है. किसी को पता नहीं है. गांव में मार्टिन का घर कच्ची मिट्टी का है.
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