बसिया के ओमप्रकाश साहू की मत्स्य क्रांति के मुरीद पीएम मोदी, ‘मन की बात’ में कही बड़ी बात

Mann Ki Baat: गुमला के बसिया जिले के रहने वाले एक शख्स ने ऐसा काम किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उससे प्रभावित हैं. जी हां, पीएम मोदी ने खुद 27 जुलाई 2025 को अपने मन की बात में उस शख्स के नाम का जिक्र किया. इस शख्स का नाम है ओम प्रकाश. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिये गांव से पलायन रोकने में अहम भूमिका निभायी है. जानें उनके कार्यों के बारे में.

Mann Ki Baat| बसिया (गुमला), कमलेश साहू : गुमला जिले से 70 किलोमीटर दूर बसिया प्रखंड क्षेत्र के कुम्हारी निवासी ओमप्रकाश साहू की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में सुनायी है. ओमप्रकाश साहू बसिया प्रखंड के ऐसे क्षेत्र से आते हैं, जहां कभी नक्सलियों एवं उग्रवादियों की वजह से लोग दिन के उजाले में भी जाने से डरते थे. आज उस क्षेत्र में मत्स्य पालन ने ग्रामीणों की तस्वीर बदल दी है.

ओमप्रकाश साहू की पहल पर 20 तालाबों का हुआ निर्माण

यह संभव हो पाया है, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से. ओमप्रकाश साहू ने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस योजना के माध्यम से एक ही स्थान पर 20 तालाबों का निर्माण कराया. स्थानीय ग्रामीण संगठित रूप से इन तालाबों में मत्स्य पालन कर रहे हैं.

गुमला जिले के बसिया प्रखंड के कुम्हारी गांव के ओमप्रकाश साहू. फोटो : प्रभात खबर

भाकपा माओवादी और पीएलएफआई में थी वर्चस्व की जंग

आज से एक दशक पूर्व इस क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) एवं उग्रवादी संगठन पीएलएफआई वर्चस्व के लिए जमींदारों और आम नागरिकों को बेवजह जान से मार डालते थे. ग्रामीण बताते हैं कि स्थिति ऐसी थी कि लोग रात के अंधेरे की बात तो दूर, दिन के उजाले में भी अपने घरों से बाहर निकलने से डरते थे.

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नक्सलवाद खात्म होने के बाद सामने आयी रोजगार की समस्या

परिस्थितियां बदलीं. लोगों ने पुलिस प्रशासन के सहयोग से नक्सलियों और उग्रवादियों के खिलाफ बिगुल फूंका और फिर धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो गया. स्थिति सामान्य होने के बाद यहां के लोगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या थी, रोजगार पाने की.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना बना ग्रामीणों का सहारा

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया, भारत सरकार की ओर से मछली पालन के क्षेत्र में विकास के लिए शुरू की गयी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना. इस योजना से जुड़कर ओमप्रकाश साहू ने ग्रामीणों के सहयोग से मछली उत्पादन शुरू कर अपनी आय में वृद्धि की है.

धान की खेती से अधिक मछली से हो रही है कमाई

ओमप्रकाश साहू बताते हैं कि जितनी आय धान की खेती से नहीं होती, उससे कहीं अधिक मत्स्य पालन कर कमाई हो जाती है. उन्होंने बताया कि जिनके पास खुद का तालाब था, वे तो खेती कर ही रहे थे, जिनके पास तालाब नहीं था, वे सरकारी तालाबों को लीज पर लेकर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालन कर रहे हैं.

रोजगार के लिए अब पलायन नहीं करते लोग – ओमप्रकाश

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के सामूहिक रूप से मिलकर मछली पालन के माध्यम से रोजगार का एक नया जरिया खोला है. ओमप्रकाश साहू ने बताया कि अब जब नक्सलवाद का दौर खत्म हो चका है, तो लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ रहा है.

गांव में ही लोगों को मिलने लगा है रोजगार. फोटो : प्रभात खबर

मजदूरों को गांव में ही मिल गया है रोजगार

प्रदेश के किसी इलाके में मुश्किल से रोजगार मिल भी जाता था, तो जितनी आय नहीं होती थी, उससे अधिक खर्च हो जाता था. अब मजदूरों को पलायन करने कि जरूरत नहीं है, क्योंकि अब गांव में ही उन्हें रोजगार मिल गया है.

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By Mithilesh jha

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