करमा पर्व से पहले विद्यार्थियों को बांटे गये मांदर, संस्कृति से जुड़े रहने का दिया संदेश

गुमला में आगामी करमा पूजा को देखते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर बांटे गए. उपायुक्त ने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपरा को सहेजना आवश्यक है. यह मांदर सिर्फ वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान है.

गुमला. आगामी करमा पूजा के मद्देनजर जिला प्रशासन की ओर से सर्किट हाउस परिसर स्थित सभागार में कल्याण विभाग के आवासीय विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर का वितरण किया गया. उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने विद्यार्थियों को मांदर प्रदान करते हुए अपनी संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत को सहेजने का संदेश दिया.

उपायुक्त ने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी सभ्यता और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए. मांदर महज एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन की अभिव्यक्ति है. उन्होंने विद्यार्थियों से करमा पर्व की मूल भावना प्रकृति के प्रति सम्मान, भाईचारा, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकजुटता को आत्मसात करने की अपील की.

अपर समाहर्ता राजीव नीरज ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश निहित है. विद्यार्थियों के बीच मांदर वितरण उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की पहल है. अनुमंडल पदाधिकारी सदर अखिलेश कुमार ने कहा कि करमा पूजा सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का पर्व है. मांदर की थाप लोक संस्कृति की विशिष्ट पहचान है.

जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी विभाग की प्राथमिकता है. मांदर वितरण से पारंपरिक कला एवं लोक संगीत के प्रति रुचि बढ़ेगी.

मांदर मिलने पर विद्यार्थियों में उत्साह दिखा. उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा. कार्यक्रम में सहायक जिला जनसंपर्क पदाधिकारी एलीना दास सहित संबंधित पदाधिकारी, कर्मी एवं विभिन्न आवासीय विद्यालयों-महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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