गुमला: 31 जुलाई को संत इग्नासियुस लोयोला का पर्व दिवस मनाया जाता है. इसी दिन वर्ष 1556 में उनका निधन हुआ था. एक वीर सैनिक से संत बनने तक की उनकी जीवन यात्रा त्याग, आत्मपरिवर्तन, सेवा और आध्यात्मिक साधना का अद्भुत उदाहरण है. उनका जीवन आज भी समाज को सकारात्मक बदलाव और मानव सेवा की प्रेरणा देता है. संत इग्नासियुस प्लस टू उवि गुमला के प्रधानाध्यापक फादर मनोहर खोया ने बताया कि संत इग्नासियुस का मूल नाम इनिगो था.
उनका जन्म वर्ष 1491 में स्पेन के एक अभिजातीय परिवार में हुआ था. 13 भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे. तत्कालीन परंपरा के अनुसार उन्हें कलीसिया की सेवा के लिए पुरोहित बनना था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें सैनिक जीवन की ओर मोड़ दिया. उन्होंने बताया कि वर्ष 1516 में स्पेन के राजा फर्डिनेंड की मृत्यु के बाद इग्नासियुस ने अपना पुराना कार्य छोड़ कर 1517 में सैनिक सेवा में प्रवेश किया.
वर्ष 1521 में फ्रांस द्वारा नावार प्रदेश पर किये गये आक्रमण के दौरान तोप का गोला उनके पैर में लगा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गये. उनके अदम्य साहस से प्रभावित होकर शत्रु सैनिकों ने उन्हें उनके घर लोयोला पहुंचा दिया. इलाज के दौरान उन्होंने संतों के जीवन और प्रभु यीशु मसीह से संबंधित धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन किया.
इन पुस्तकों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागकर ईश्वर की सेवा का मार्ग चुना. फादर मनोहर खोया ने बताया कि मार्च 1522 से फरवरी 1523 तक इग्नासियुस ने मनरेसा की एक गुफा में रहकर कठोर तपस्या, प्रार्थना और आध्यात्मिक साधना की.
24 जून 1537 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ. इसके बाद उन्होंने यीशु समाज (सोसायटी ऑफ जीसस) के संगठन, संचालन और उसके संविधान के निर्माण में अपना जीवन समर्पित कर दिया. 31 जुलाई 1556 को उनका निधन हो गया. बाद में वर्ष 1609 में संत पापा पौलुस पंचम ने उन्हें धन्य घोषित किया और वर्ष 1622 में संत पापा ग्रेगोरी पंद्रहवें ने उन्हें संत घोषित किया.
1934 में हुई थी संत इग्नासियुस विद्यालय की स्थापनाफादर मनोहर खोया ने बताया कि संत इग्नासियुस उवि गुमला की स्थापना वर्ष 1934 में यीशु समाज के फादरों द्वारा की गयी थी. यह विद्यालय यीशु समाज धार्मिक संघ द्वारा स्थापित व संचालित है. इसे राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त है तथा यह धार्मिक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के रूप में अधिसूचित है. विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना के विकास के लिए भी जाना जाता है.
