गुमला. गुमला शहर के थाना रोड में जिला परिषद की 55 दुकानें हैं. जिसपर विभिन्न प्रकार के दुकान संचालित है. लेकिन जिन लोगों ने दुकानें ले रखी है. उन लोगों ने किराया नहीं दिया है. इस मामले को जिला परिषद ने गंभीरता से लिया है. जिला परिषद के अनुसार 55 दुकानदारों के पास करीब 50 लाख रुपये बकाया है. इसमें सभी दुकानदारों को बकाया किराया भुगतान करने के लिए नोटिस दिया गया है. इसमें कुछ लोगों ने किराया दिया है. परंतु, अधिकांश लोगों ने किराया नहीं दिया और किराया का पैसा दबाकर बैठे हैं. इसलिए जिला परिषद ने जांच की तैयारी की है. जांच करने के बाद अवैध रूप से कब्जा कर दुकान चला रहे दुकानदारों को हटाया जायेगा. साथ ही नये सिरे से पुन: दुकानों का टेंडर होगा. इधर, गुमला जिला परिषद ने जिले के सभी प्रखंड जहां जहां जिप से दुकानें बनी है. उसकी जांच शुरू कर दी है. उपविकास आयुक्त के निर्देश पर जांच चल रही है. ताकि किराया का पैसा समय पर मिल सके.
घाघरा में 9 साल से 44 दुकानों पर कब्जा
इधर, घाघरा में 9 साल से 44 दुकानों पर कब्जा, 35 लाख बकाया घाघरा प्रखंड मुख्यालय के लोहरदगा एवं नेतरहाट रोड में जिला परिषद द्वारा वर्ष 2017 में आवंटित 44 दुकानों के पास करीब 35 लाख रुपये किराया बकाया है. इतनी मोटी रकम अब जिला परिषद के लिए वसूलना चुनौती बन गयी है. ऐसे, जिला परिषद ने जिन दुकानदारों ने किराया नहीं दिया है. उनके खिलाफ नोटिस के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है. यहां बता दें कि नौ वर्ष बीतने के बावजूद कई दुकानदारों ने अब तक पूरी राशि जमा नहीं की है.
बकायेदार दुकानदारों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने का निर्देश
जिला परिषद ने बकायेदार दुकानदारों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद जिला परिषद के अधिकारी घाघरा पहुंचे और दुकानदारों से बकाया राशि की वसूली का प्रयास किया. इस दौरान सभी दुकानदारों से मिलकर करीब 76 हजार रुपये की राशि ही प्राप्त हो सकी है. अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि नोटिस के बावजूद राशि जमा नहीं करने वाले दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.
बकाया राशि जमा नहीं करने पर दुकानों को खाली कराने की शुरू होगी प्रक्रिया
तीसरा नोटिस जारी होने के बाद बकाया राशि जमा नहीं करने पर दुकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इधर, अधिकारियों की जांच में कई लोगों ने अवैध रूप से दुकान पर कब्जा कर रखा है. दुकानदारों ने बताया कि कई दुकानें वर्षों से बंद है. जबकि कुछ आवंटित दुकानों को अन्य लोगों को किराये पर दे दिया गया है. जिला परिषद ने भी ऐसे मामलों की जांच शुरू कर दी है. दूसरी ओर, कई बेरोजगार युवाओं ने लंबे समय से बंद दुकानों का आवंटन नये सिरे से करने की मांग की है.
