गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla Woman Begging, गुमला : झारखंड के गुमला जिले से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद दिल छू लेने वाली घटना देखने को मिली है. यहां सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे एक गरीब मरीज के इलाज के लिए उसकी लाचार पत्नी को शहर की व्यस्त सड़क पर राहगीरों के सामने आंचल फैलाकर भीख (आर्थिक मदद) मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा है. मरीज के परिजनों का सीधा आरोप है कि सदर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी शुरुआती औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संसाधनों की कमी का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद पूरा परिवार बेसहारा हो गया है. इस घटना ने राज्य की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं और जन कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
कमाऊ सदस्य अस्पताल के बेड पर, घर में छाई घोर कंगाली
मिली जानकारी के अनुसार, गुमला सदर प्रखंड के काटासारू गांव के रहने वाले जगन्नाथ तिर्की पिछले एक सप्ताह से गंभीर बीमारी के कारण सदर अस्पताल गुमला में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अस्पताल में पति के इलाज में जुटी उनकी पत्नी रोहिणी कुजूर ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी (भयानक कंगाली) के कारण उनके पति के इलाज में हर दिन रुकावटें आ रही हैं. गंभीर बात यह है कि इस अत्यंत गरीब परिवार के पास आज तक न तो कोई राशन कार्ड बना है और न ही आयुष्मान कार्ड जैसी किसी योजना का लाभ उन्हें मिल रहा है. पूरे घर में जगन्नाथ ही एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति थे, लेकिन उनके अस्पताल के बेड पर पड़ जाने के कारण अब घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है.
जशपुर रोड पर आंचल फैलाकर मांगी मदद
जब अस्पताल से कोई विशेष राहत नहीं मिली और दवाइयां बाहर से खरीदने की नौबत आ गई, तो पति की जान बचाने की आस में रोहिणी कुजूर स्थानीय जशपुर रोड स्थित टंगरा मार्केट के समीप सड़क किनारे बैठ गई. वह वहां से गुजरने वाले हर राहगीर के सामने अपना आंचल फैलाकर रो-रोकर इलाज के लिए चंद रुपयों की भीख मांगती नजर आई. इस दौरान सामाजिक संवेदना दिखाते हुए उनके साथ जिलाध्यक्ष सह प्रदेश सचिव देवकी देवी भी सड़क पर मौजूद थीं. दोनों ने मिलकर आम जनता से मरीज की जान बचाने के लिए वित्तीय सहयोग करने की मार्मिक अपील की. इस भावुक दृश्य को देखकर सड़क से गुजरने वाले राहगीरों का दिल पसीज गया और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार 10, 20, 50, 100 और 200 रुपये तक की आर्थिक सहायता रोहिणी के आंचल में डाली. हालांकि, परिजनों का कहना है कि गंभीर बीमारी के महंगे इलाज और महंगी बाहरी दवाइयों के आगे यह चंद रुपयों की चिल्लर राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है.
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पति के जिंदा रहते ही असहाय
अपनी दयनीय स्थिति बयां करते हुए रोहिणी कुजूर ने कहा, “अस्पताल में जो मरीजों को मुफ्त भोजन मिलता है, उसी के सहारे मैं, मेरे बीमार पति और हमारा छोटा बच्चा किसी तरह दिन में एक वक्त खाकर गुजारा कर रहे हैं. पति की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और छोटे बच्चे की भूख देखकर मैं भीतर से पूरी तरह टूट चुकी हूं. राशन कार्ड नहीं होने की वजह से हमें सरकारी अनाज भी नहीं मिलता और डॉक्टर लगातार बाहर की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं. एक तरफ पति की दर्द से निकलती चीखें हैं, दूसरी तरफ बच्चे की जिम्मेदारी और इन सबके बीच यह जानलेवा कंगाली… इस व्यवस्था ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.”
प्रशासन और सामाजिक संगठन तुरंत आगे आएं: देवकी देवी
मौके पर मौजूद सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता देवकी देवी ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया. उन्होंने झारखंड सरकार, गुमला जिला प्रशासन और स्थानीय सामाजिक संगठनों से हाथ जोड़कर पुरजोर अपील की है कि जगन्नाथ तिर्की की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सहायता और विशेष आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस गरीब परिवार को मुफ्त सरकारी दवाइयां और बेहतर इलाज नहीं मिला, तो एक मासूम के सिर से पिता का साया उठ जाएगा, जो पूरे समाज और प्रशासनिक तंत्र के लिए बेहद शर्मनाक होगा.
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