गुमला में सूख रही हैं लाइफ लाइन नदियां, शहरी क्षेत्र में भी पानी की समस्या

Gumla News : गुमला जिले में भीषण गर्मी के कारण नदियां, कुएं और तालाब सूखने लगे हैं. शहरी से ग्रामीण इलाकों तक जल संकट गहरा गया है. पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे इंसानों के साथ पशु-पक्षी भी परेशान हैं.

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट 

Gumla News : झारखंड में गर्मी बढ़ गई है. पारा 39 और 40 डिग्री सेल्सियस हर दिन रह रही है. गर्मी का असर दिखने लगा है नदी, नाला, कुआं का जलस्तर रसातल में जा रहा है, जिससे जल संकट गहरा गया है. प्रभात खबर ने एक साथ आठ प्रखंडों की पड़ताल की. पेयजल की क्या स्थिति है. किसान, पशु पक्षी की क्या स्थिति हो रही है. पेयजल की वर्तमान हकीकत की जानकारी ली. जिस तेजी से गर्मी पड़ रही है नदियों में तेजी से पानी कम हो रही है . गुमला जिले की लाइफ लाइन कहे जाने वाली नदियां सूख गई है. कुछ नदियों में हल्की पानी है. कुछ नदियों में कामचलाऊ बांध बनाया गया है. परंतु इसी प्रकार गर्मी रही तो आने वाले एक सप्ताह बाद ये नदियां भी सूख जाएगी. इसमें कई नदियों से शहर से लेकर गांव तक पानी की सप्लाई होती है. नदियां सूखने से सबसे ज्यादा परेशानी पशु पक्षियों को है, क्योंकि नदी नालों के सहारे ही पशु पक्षी अपनी प्यास बुझाते हैं. नदी किनारे बसे गांव को भी संकट झेलनी पड़ सकती है. नदी किनारे स्थित खेत में सिंचाई के लिए पानी खत्म हो गया है. हालांकि कुछ लोग नदियों में बोरा बांध बनाकर पानी रोकने में लगे हुए हैं. जिससे पानी जमा कर कुछ दिनों तक उसका उपयोग कर सके.

गुमला शहर के कई इलाकों में पानी सप्लाई नहीं

नगर परिषद की लापरवाही से गुमला शहर के कई इलाकों में पानी सप्लाई बंद है. पाइप बिछा हुआ है, लेकिन उसमें पानी की सप्लाई नहीं हो रही है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है. यहां तक कि जिन मुहल्लों में चार-पांच साल पहले पानी सप्लाई होती थी उन मुहल्लों में भी पानी सप्लाई बंद कर दी गई है. जिसका सीधा असर इस गर्मी में देखने को मिल रहा है. लोग इधर उधर से पानी जुगाड़ कर घरेलू काम करने और प्यास बुझाने का काम कर रहे हैं. नगर परिषद गुमला की अध्यक्ष शकुंतला उरांव व उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा है कि गुमला शहर में जल संकट गहराने नहीं दिया जाएगा. जरूरत पड़ी तो टैंकर के माध्यम से पानी की सप्लाई हर मुहल्ले में की जाएगी.

सिसई : 90 प्रतिशत जलमीनार बेकार, मेगा प्रोजेक्ट भी अधूरा

सिसई प्रखंड क्षेत्र में जल संकट गहराने से कुएं, नदी और तालाब सूख चुके हैं. जिससे पेयजल, सिंचाई और पशुपालन ठप है. क्षेत्र में सरकारी राशि से लगी सैकड़ों जलमीनारों में से लगभग 90 प्रतिशत अनुपयोगी पड़ी हैं. जल जीवन मिशन के तहत पोड़हा गांव में करीब दो सौ करोड़ की लागत से बन रही जलमीनार चार साल बाद भी अधूरी है. वहीं, प्रखंड मुख्यालय की जलमीनार भी पानी के अभाव से जूझ रही है. स्थायी चेकडैम न होने से नदियों में जल भंडारण नहीं हो पाता, जिससे इंटेकवेल सूख जाते हैं. फिलहाल कर्मी कच्चा बांध बनाकर जैसे-तैसे पेयजल आपूर्ति करने को मजबूर हैं.

कामडारा : भीषण गर्मी में पेयजल संकट गहराया

कामडारा प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी के कारण पेयजल संकट गहराने लगा है. गांवों में लगी 90 प्रतिशत सोलर जलमीनारें खराब पड़ी हैं. हर घर नल योजना के तहत नलों में नियमित पानी नहीं आ रहा है. प्रखंड मुख्यालय परिसर में पानी की व्यवस्था न होने से दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को भटकना पड़ता है. अंचल कार्यालय में लगा आरओ फिल्टर मशीन महीनों से खराब है, जिसे ठीक कराने में अधिकारी या जनप्रतिनिधि दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. सरकार के सख्त निर्देश के बावजूद कि सार्वजनिक जगहों पर पानी की व्यवस्था की जाए, यहां के हालात बदतर हैं और मशीनें सिर्फ शोभा की वस्तु बनी हुई है.

बिशुनपुर : भीषण गर्मी से सूखी कोयल नदी, जलापूर्ति ठप

बिशुनपुर प्रखंड में भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी सूखने की कगार पर है, जबकि अन्य छोटे जलस्रोत नाले में तब्दील हो चुके हैं. इससे पूरे क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है. पीएचईडी विभाग की जलमीनार से छह महीने बाद दो दिन पहले ही जलापूर्ति शुरू हुई थी, लेकिन मशीन खराब होने से वह फिर बंद हो गई. जलापूर्ति कर्मी कमल महली के अनुसार मरम्मत का कार्य जारी है और गुरुवार से आपूर्ति सुचारू होने की उम्मीद है. वहीं बनारी क्षेत्र में भी पर्याप्त पानी न मिलने से ग्रामीण परेशान हैं और अब पीने के पानी के लिए पूरी तरह से कुओं और चापानलों पर निर्भर हो चुके हैं.

डुमरी : करोड़ों की पानी टंकी योजना अधूरी रहने से हाहाकार

डुमरी प्रखंड में भीषण गर्मी के कारण जल संकट गहरा गया है. अधिकांश नदी, कुएं और तालाब सूखने से ग्रामीण पेयजल के लिये भटकने को मजबूर हैं. पंचायतों में लगी अधिकतर जलमीनारें महीनों से खराब पड़ी हैं. वहीं मुख्यालय परिसर में करोड़ों की लागत से बन रही पानी टंकी परियोजना भी धीमी गति के कारण अधूरी लटकी है. जिससे जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. पानी के लिये महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज जाना पड़ रहा है. इस संकट का बुरा असर पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है, जो पानी के अभाव में इधर-उधर भटक रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से खराब जलमीनारों की जल्द मरम्मत कराने और अधूरी जलापूर्ति योजना को अविलंब पूरा करने की मांग की है.

घाघरा : 70% जलमीनारें खराब, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

घाघरा प्रखंड क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी और पेयजल संकट की दोहरी मार झेल रहा है. लगातार बढ़ते तापमान और बारिश न होने के कारण क्षेत्र की नदियों का जलस्तर तेजी से घट गया है, जबकि कई छोटे जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं. सरकार ने हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए नल-जल योजना के तहत विभिन्न गांवों में जलमीनारों का निर्माण कराया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में इनमें से लगभग 70 प्रतिशत जलमीनारें खराब पड़ी है. कहीं मोटर खराब है तो कहीं पाइपलाइन और सोलर सिस्टम ठप है. इसके चलते ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं और चापाकलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अविलंब खराब जलमीनारों की मरम्मत कराकर पेयजल बहाल करने की मांग की है.

पालकोट : पिंजरा नदी सूखी, जलापूर्ति ठप, हाहाकार

पालकोट प्रखंड में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है. जलापूर्ति का एकमात्र जरिया पिंजरा नदी सूखने से पालकोट दक्षिणी पंचायत के बस पड़ाव, सुभाष नगर, बंगाली टोली सहित कई बस्तियों में पानी के लिए हाहाकार मचा है. ग्रामीण अब सुबह 4 बजे से प्राकृतिक निझर झरना पर लाइन लगाने को मजबूर हैं. वहीं संजय गांधी चौक के दो सरकारी नलकूपों पर दबंगों के कब्जे और बाजार टांड़ में दो महीने से तैयार जिला परिषद की जलमीनार के चालू न होने से नाराजगी है. पहाड़ से पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा है. इधर 2019 से कार्यरत जलापूर्ति कर्मी रतिया साहू ने बताया कि उन्हें दो साल का वेतन मिलने के बाद से अब तक भुगतान नहीं हुआ है. जिससे वे आर्थिक तंगी के बावजूद जैसे-तैसे काम कर रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब व्यवस्था सुधारने की मांग की है.

जारी : भीषण गर्मी में चापाकल और जलमीनारें ठप

जारी प्रखंड में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण जल संकट गहरा गया है. क्षेत्र के कई गांवों में चापाकल पूरी तरह जवाब दे चुके हैं, जबकि नदी, कुएं और तालाब सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं. जलस्तर काफी नीचे चले जाने के कारण गांवों में लगी जलमीनारों से भी पानी की सप्लाई बंद हो गई है. इस विकट स्थिति में ग्रामीणों को पीने के शुद्ध पानी के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है. पेयजल के इस हाहाकार के बीच अब ग्रामीण आसमान से राहत की बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

चैनपुर : शंख नदी सूखी, नल-जल योजना भी अधूरी

चैनपुर प्रखंड में भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण जल संकट की समस्या गहरा गई है. क्षेत्र की जीवनदायिनी शंख नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है, जबकि दूर-दराज के डोरी नाले और अन्य जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं. इससे इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के लिये भी पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. ग्रामीण इलाकों में लगी कई जलमीनारें खराब पड़ी हैं. वहीं सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का लाभ भी लोगों को नहीं मिल पा रहा है. कई जगहों पर योजना अब तक शुरू नहीं हुई है, तो अधिकांश गांवों में अभी तक पाइपलाइन भी नहीं बिछाई जा सकी है. अव्यवस्था के कारण ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.

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Published by: Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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