गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Water Crisis: झारखंड के गुमला प्रखंड के नवाडीह गांव में सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह गई हैं. प्रशासन की निगरानी से दूर यह गांव आज भी पेयजल संकट का सामना कर रहा है. गांव के लगभग 50 परिवार शुद्ध पेयजल से वंचित हैं और मजबूरी में नदी का पानी पीने को विवश हैं. यह हालात ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर गंभीर असर डाल रहे हैं.
खटवा नदी बना पीने के पानी का सहारा
नवाडीह गांव के लोग खटवा नदी के पझरा पानी का इस्तेमाल पीने और घरेलू कामों के लिए कर रहे हैं. यही नदी मवेशियों का भी पानी पीने का मुख्य स्रोत है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे चुआं खोदकर उसमें जमा होने वाले पानी को कटोरी से उबाछ कर डेगची में भरकर घर ले जाया जाता है. यही पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल हो रहा है.
पेयजल व्यवस्था पूरी तरह फेल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कभी जलमीनार और पेयजल योजना की शुरुआत हुई थी, लेकिन आज वह पूरी तरह से खराब पड़ी है. न तो पाइपलाइन से पानी आता है और न ही किसी तरह की मरम्मत की गई है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की लापरवाही के कारण गांव की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है.
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
गंदा और असुरक्षित पानी पीने के कारण गांव में बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को अक्सर पेट से जुड़ी बीमारियां होती रहती हैं. बावजूद इसके अब तक स्वास्थ्य और पेयजल से जुड़े किसी भी विभाग ने स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है.
प्रशासन से ग्रामीणों की मांग
नवाडीह गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जलमीनार की मरम्मत कराई जाए और शुद्ध पेयजल की नियमित व्यवस्था की जाए. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसी बड़ी बीमारी का खतरा भी पैदा हो सकता है.
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क्या कहते हैं अधिकारी
इस मामले पर डीपीओ रमन कुमार ने कहा है कि नवाडीह गांव में जल संकट की समस्या को दूर करने की पहल की जा रही है. विभाग स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है और जल्द ही गांव में पानी की समस्या दूर की जाएगी. ग्रामीणों को अब प्रशासन की इस पहल के जमीन पर उतरने का इंतजार है.
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