गुमला अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल रहा खून, स्टॉक हुआ खत्म

Gumla News: गुमला सदर अस्पताल में खून की कमी हो गई है और ब्लड बैंक में स्टॉक शून्य हो गया है. खून नहीं मिलने से कई मरीज परेशान हैं और उनका इलाज समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट 

Gumla News: चाईबासा में एचआइवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाएं जाने के मामले के बाद मचे बवाल और ब्लड बैंक के सील होने का सीधा असर अब गुमला के सरकारी अस्पताल पर दिखने लगा है. नियमों की सख्ती और आपूर्ति बाधित होने के कारण गुमला सदर अस्पताल में रक्त का अकाल पड़ गया है. जिस कारण ब्लड बैंक में अक्सर ताला लटका दिखता है. वर्तमान स्थिति यह है कि सदर अस्पताल गुमला में अभी एक भी यूनिट खून उपलब्ध नहीं है. अस्पताल परिसर में लगी रक्त उपलब्धता पंजी डिस्प्ले बोर्ड पर इन दिनों या तो एक यूनिट या फिर शून्य का विज्ञापन चमकता रहता है, जो मरीजों के परिजनों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है.

डोनर है, पर खून लेने की व्यवस्था नहीं : विशेश्वर

अस्पताल में बीते शु्क्रवार से इलाज करा रहे घाघरा निवासी विशेश्वर सिंह ने बताया कि कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता है. चिकित्सक ने खून चढ़ाने की बात कही है. डोनर सुदेश सिंह द्वारा एक यूनिट खून देने पर अभी एक यूनिट खून चढ़ा है. दो यूनिट और खून की जरूरत है और हमारे पास डोनर मौजूद है, लेकिन व्यवस्था ऐसी बनी है कि डोनर होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा खून उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. ऐसे में रोने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प भी नहीं है.

रांची से गुमला लाया गया खून : मंगल लोहरा

बसिया निवासी 55 वर्षीय मंगन लोहरा के शरीर में खून नहीं बनने के कारण सदर अस्पताल गुमला में बीते शुक्रवार से अपना इलाज करवा रहे हैं. मंगन का बेटा अमित मिंज रांची जाकर एक यूनिट खून लाकर अपने पिता को चढ़वाया. समय पर खून नहीं चढ़ाने से इलाजरत मंगन की तबीयत और खराब हो सकती है. बेटे अमित ने कहा कि गरीबी के कारण बार-बार रांची जाकर खून भी नहीं लाया जा सकता. प्रबंधन जल्द गुमला में ही ब्लड बैंक सुचारू रूप से चालू करने की पहल करे.

खून नहीं मिलेगा तो मैं मर जाऊंगी : मंजू देवी

गुमला शहर के चेटर निवासी 60 वर्षीय मंजू देवी शरीर में कमजोरी होने के कारण बीते गुरुवार को सदर अस्पताल गुमला में इलाज के लिए भर्ती हुई थी. बेटी रानी कुमारी ने बताया कि डोनर ढ़ूंढ़कर देने के बाद एक यूनिट खून अभी तक मरीज को चढ़ाया गया है. हमलोगों के पास पैसे भी इतने नहीं है कि रांची जाकर खून लाया जा सके. इस तरह अस्पताल की व्यवस्था रही तो लोगों को अस्पताला में बैठे बैठे ही जान से हाथ धो देना पड़ेगा. उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द ब्लड बैंक शुरू करने की अपील की है.

व्यवस्था के कारण अब मरने का इंतजार है : दिगंबर

रायडीह प्रखंड के कुलमुंडा निवासी 26 वर्षीय दिगंबर प्रधान खून की कमी के कारण 31 मार्च को सदर अस्पताल में भर्ती हुआ है. छोटा भाई प्रेम प्रधान द्वारा एक यूनिट खून देने के बाद भी खून देरी से मिला. जिस कारण हाथापाई की भी नौबत आ गई थी. अभी तक दो यूनिट खून चढ़ाया गया है. डोनर ढ़ूंढ़कर बैठे हैं पर यहां व्यवस्था ही ठीक नहीं है. जिस कारण अब धीरे धीरे मरने का इंतेजार कर रहे हैं. उन्होंने प्रबंधन से व्यवस्था दुरूस्त करने की मांग की है.

प्रशासन अलर्ट, उपायुक्त ने शुरू किया महादान अभियान

रक्त की इस भारी किल्लत को देखते हुए गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने जिले के सभी प्रखंडों में रक्तदान शिविर लगाने और लोगों को इस महादान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है. प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द स्टॉक को दोबारा भरा जाए जिससे किसी की जान जोखिम में न पड़े. अभियान की शुरुआत 11 अप्रैल को डुमरी प्रखंड से होगी. इसके बाद 13 अप्रैल को जारी, 16 अप्रैल को सदर गुमला, 18 अप्रैल को पालकोट, 20 अप्रैल को सिसई, 22 अप्रैल को बसिया, 24 अप्रैल को कामडारा, 27 अप्रैल को बिशुनपुर, 29 अप्रैल को भरनो और 30 अप्रैल को चैनपुर में शिविर लगाएं जाएंगे. वहीं मई महीने में भी यह अभियान जारी रहेगा, जिसके तहत 4 मई को घाघरा और 6 मई को रायडीह में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा.

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By Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.

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