11 साल पहले बना सांसद आदर्श ग्राम, फिर भी बदहाल मतिमटोली; 223 में सिर्फ 3 योजनाएं धरातल पर

सांसद आदर्श ग्राम मतिमटोली में 223 योजनाएं स्वीकृत हुईं, लेकिन काम सिर्फ तीन पर हुआ;. बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है गांव, जानें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट.

गुमला. पालकोट प्रखंड का मतिमटोली गांव वर्ष 2015 में सांसद आदर्श ग्राम के रूप में चुना गया था. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी. लेकिन 11 साल बाद भी गांव की तस्वीर नहीं बदली. गांव में आज भी सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. सबसे चिंताजनक स्थिति स्वास्थ्य सुविधा की है. दो दिन पहले ही गांव में इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण दो मासूम भाइयों की मौत हो गयी थी.

223 योजनाएं स्वीकृत, तीन पर ही हुआ काम

मतिमटोली को सांसद आदर्श ग्राम के तहत कुल 223 योजनाओं के लिए स्वीकृति मिली थी. ग्रामीणों के अनुसार इनमें से सिर्फ तीन योजनाओं पर काम हुआ. बाकी योजनाओं पर या तो काम शुरू ही नहीं हुआ या शुरू होने के बाद पूरा नहीं किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ योजनाओं में काम हुआ भी तो वे अधूरे रह गये या उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठे.

पूर्व सीडब्ल्यूसी सदस्य अलख नारायण सिंह ने कहा कि मतिमटोली को आदर्श ग्राम घोषित किया गया था. गांव के लिए 223 योजनाएं स्वीकृत हुई थीं, लेकिन एक भी योजना पूरी तरह सफल नहीं हुई. उनके अनुसार सिर्फ प्राथमिक विद्यालय की घेराबंदी का काम पूरा हुआ है. बाकी योजनाओं की स्थिति आज भी स्पष्ट नहीं है.

सिर्फ एक साल चला जलमीनार

पूर्व वार्ड सदस्य नामलेन केरकेटटा ने बताया कि सांसद आदर्श ग्राम बनने के बाद गांव में सिर्फ जलमीनार का निर्माण हुआ. वह भी करीब एक साल तक ही ठीक रहा. इसके बाद जलमीनार खराब हो गया. उन्होंने कहा कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क है, लेकिन इसे दूर करने की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई.

पानी, बिजली और सड़क की समस्या बरकरार

ग्रामीण सुरेश सिंह ने कहा कि गांव में विकास का काम लगभग शून्य है. सांसद आदर्श ग्राम का दर्जा मिलने के बावजूद ग्रामीण पानी, बिजली और सड़क जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इन समस्याओं को दूर करने के लिए कई बार मांग की गयी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ. गांव में पेयजल की भी गंभीर समस्या है. ग्रामीणों को शुद्ध पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है. शौचालय और जल निकासी की व्यवस्था भी बेहतर नहीं है.

स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर ग्रामीण डॉक्टर और झाड़फूंक

मतिमटोली में स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति भी चिंताजनक है. ग्रामीण फ्रांसिस उरांव ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य केंद्र या पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं है. बीमार होने पर ग्रामीण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध डॉक्टर से इलाज कराते हैं. कई लोग बीमारी में झाड़फूंक का भी सहारा लेते हैं. स्वास्थ्य सुविधा के अभाव का असर हाल में सामने आया, जब दो मासूम भाइयों की इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गयी. इस घटना ने गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

रोजगार नहीं, पलायन और मानव तस्करी की चिंता

गांव में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है. ग्रामीण क्षेत्र लंबे समय से पलायन और मानव तस्करी की समस्या से भी प्रभावित रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में रोजगार और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो पलायन पर काफी हद तक रोक लग सकती है.

पूर्व सांसद एमजे अकबर ने लिया था गोद

मतिमटोली गांव को वर्ष 2015 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद एमजे अकबर ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था. गांव को आदर्श बनाने की पहल प्रधानमंत्री के पूर्व निजी सचिव और आईएएस अधिकारी राजीव टोप्पो की पहल पर हुई थी. राजीव टोप्पो का यह पैतृक गांव बताया जाता है. गांव को सांसद आदर्श ग्राम चुने जाने के समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब गांव की तस्वीर बदलेगी. लेकिन 11 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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