गुमला: दिवंगत बेटे की याद में पिता ने दान की एंबुलेंस, एसपी ने दिखाई हरी झंडी; कहा- सेवा से जिंदा रहेगी सिद्धांत की स्मृति

गुमला में एक पिता ने अपने दिवंगत बेटे सिद्धांत आनंद की याद में समाजसेवा के लिए एक एंबुलेंस दान की है. इस भावुक पहल को एसपी हारिस बिन जमां ने सराहा और हरी झंडी दिखाकर एंबुलेंस को रवाना किया.

गुमला. शहर के गोपाल मंदिर परिसर में शुक्रवार को सिद्धांत आनंद फाउंडेशन के तत्वावधान में सिद्धांत आनंद की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. इस दौरान पिता शेखर आनंद ने अपने दिवंगत बड़े बेटे सिद्धांत आनंद की स्मृति को समाजसेवा से जोड़ते हुए उसके नाम पर एक एंबुलेंस समाज को समर्पित की. मुख्य अतिथि एसपी हारिस बिन जमां ने एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कार्यक्रम की शुरुआत सिद्धांत आनंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. इसके बाद एंबुलेंस को जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित किया गया.

बेटे की स्मृति को समाजसेवा से जोड़ना भावुक और सराहनीय पहल

एसपी हारिस बिन जमां ने कहा कि बेटे की स्मृति को समाजसेवा से जोड़ना भावुक और सराहनीय पहल है. उन्होंने कहा कि यह एंबुलेंस जरूरतमंद लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने और आपात स्थिति में मदद करने में उपयोगी साबित होगी. सेवा के माध्यम से सिद्धांत आनंद की स्मृति समाज के बीच जीवित रहेगी.

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जिंदगी बचाने में सहयोग करना ही सिद्धांत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि

पिता शेखर आनंद ने भावुक होते हुए बताया कि सिद्धांत उनका बड़ा बेटा था और पुणे में रहकर पढ़ाई कर रहा था. इसी दौरान एक हादसे में उसकी मौत हो गई थी. उन्होंने कहा कि बेटे को खोने का दर्द कभी कम नहीं होगा, लेकिन उसके नाम पर समर्पित एंबुलेंस जरूरतमंद लोगों की मदद करेगी. उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद परिवार को समय पर अस्पताल पहुंचाने और उसकी जिंदगी बचाने में सहयोग करना ही सिद्धांत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. इसी उद्देश्य से एंबुलेंस को समाज की सेवा के लिए समर्पित किया गया है. मौके पर डीएस अनुपम किशोर, जितेंद्र सिंह, बबलू वर्मा, अमन आनंद, चीनू साबू समेत समाज के कई प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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